बिलासपुर

लोखंडी घाट पर अवैध खनन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौन स्वीकृति

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर में रेत माफिया बेखौफ हो चुके हैं। लोखंडी घाट पर रोज़ाना हो रहा अवैध रेत खनन अब खुले संरक्षण में चलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

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तखतपुर विधानसभा के लोखंडी क्षेत्र में अवैध रेत खनन एक बार फिर चरम पर है। सुबह होते ही घाट पर रेत से भरे ट्रैक्टरों की लंबी कतार नजर आती है। जहाँ खनन पर सख्त रोक है, वहीं टैक्टर नदी में उतारकर दिन–रात रेत की लूट जारी है। इस पूरे गोरखधंधे में गाँव के सरपंच बलराम पटेल की भूमिका लगातार संदेह के घेरे में बताई जा रही है।

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सरपंच के खिलाफ जमीन कब्जा, दबंगई और गुंडागर्दी की कई शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच को राजनीति संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते लोखंडी रेत घाट का संचालन बेधड़क चल रहा है। बकायदा खनिज विभाग का एक कर्मचारी, जिसे यहाँ ‘महाराज’ के नाम से पुकारा जाता है, माफियाओं को खुला समर्थन दे रहा है।

कहा जा रहा है कि यही कर्मचारी रेत की काली कमाई को विभाग के अधिकारियों तक पहुँचाने का काम करता है। यही वजह है कि सिर्फ दिखावे की कार्रवाई होती है, जबकि असली अवैध खनन बिना रोक-टोक जारी रहता है। पत्रकारों ने भी इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारी राजू यादव से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। विभाग की यह मौन भूमिका लगातार सवालों के घेरे में है।

इधर ट्रैक्टरों की निरंतर आवाजाही से लोखंडी, धुरीपारा और मंगला बस्ती की सड़कें बुरी तरह टूट चुकी हैं। धूल, शोर और ट्रैफिक से स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल हो गया है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। अवैध रेत खनन पर रोक लगाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, लेकिन जब संरक्षण सत्ता से मिले और विभाग मौन रहे, तो अवैध खनन को रोकना लगभग नामुमकिन हो जाता है। सवाल अब यही है कि आखिर कब तक ग्रामीण इस अवैध कारोबार और प्रशासनिक उदासीनता का खामियाज़ा भुगतते रहेंगे?

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