फ्लाईऐश डंपिंग के लिए GPS ट्रैकिंग और जियो टैगिंग 15 अप्रैल से होगा अनिवार्य

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : फ्लाईऐश डंपिंग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि इसे अनियमित रूप से कहीं भी डंप कर दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। लेकिन अब इस पर सख्ती होने जा रही है! वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने घोषणा की है कि 15 अप्रैल से फ्लाईऐश के ट्रांसपोर्टेशन में GPS ट्रैकिंग और जियो टैगिंग अनिवार्य होगी।
फ्लाईऐश यानी कोयले से बनी वह राख, जिसे थर्मल पावर प्लांट्स से निकाला जाता है, अबतक इसे अनियमित रूप से कहीं भी डंप कर दिया जाता था। लेकिन अब इस लापरवाही को रोकने के लिए 15 अप्रैल से GPS ट्रैकिंग और जियो टैगिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। खुले में डंप की गई फ्लाईऐश हवा में मिलकर प्रदूषण फैलाती है और जल स्रोतों में मिलकर यह पानी को जहरीला बना सकती है। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा फ्लाईऐश को निर्धारित स्थान पर ही डंप किया जाना चाहिए। लेकिन अबतक ऐसा नहीं हो रहा था, जिससे कई पर्यावरण सम्बन्धी समस्याएँ उत्पन्न हो रही थीं। इसे रोकने के लिए 15 अप्रैल से सभी ट्रकों में GPS ट्रैकिंग और डंपिंग साइट पर जियो टैगिंग अनिवार्य होगी। इससे अनियमित डंपिंग पर रोक लगेगी।
GPS ट्रैकिंग से ट्रक की पूरी मूवमेंट मॉनिटर होगी, जिससे पता चलेगा कि फ्लाईऐश कहाँ ले जाई जा रही है। डंपिंग स्थल पर पहुँचते ही जियो टैगिंग से उसकी पुष्टि होगी कि राख सही जगह डंप की गई है या नहीं। यदि किसी ट्रक ने निर्धारित स्थान के अलावा कहीं और फ्लाईऐश गिराई, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। यदि कोई कंपनी या ट्रांसपोर्टर नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। फ्लाई ऐश के उठाओ से लेकर उसके डंपिंग स्थान तक निगरानी समिति भी बनाई गई है जो ऑनलाइन GPS के माध्यम से नजर रखेगी.




