बिलासपुर

सुरक्षा की मांग पड़ी भारी: बिलासपुर के नोवा प्लांट से 13 मजदूर निकाले गए, श्रम विभाग में हुई शिकायत

(धीरेंद्र मेहता) : बिलासपुर जिले से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अपने हक और सुरक्षा व्यवस्था की मांग करना कर्मचारियों को भारी पड़ गया। दगौरी के नोवा प्लांट में काम करने वाले 13 कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए काम से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अपनी जान की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई थी। यह मामला औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की स्थिति और उनके अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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पूरा मामला बिलासपुर जिले के ढाकुरी स्थित नोवा प्लांट का है। इस प्लांट में सैकड़ों कर्मचारी वर्षों से काम कर रहे हैं। कोई कर्मचारी पिछले 5 सालों से तो कोई 10 साल से भी ज्यादा समय से अपनी सेवाएं दे रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि हाल के दिनों में लगातार इंडस्ट्री में हो रही दुर्घटनाओं ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले इसी प्लांट में एक मजदूर काम के दौरान गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।

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इसी घटना के बाद कर्मचारियों के एक समूह ने प्लांट प्रबंधन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। कर्मचारियों ने 11 सूत्रीय मांगों के तहत इंडस्ट्री परिसर में एमबीबीएस डॉक्टर की व्यवस्था, एंबुलेंस की सुविधा, आपात स्थिति में मोबाइल फोन इस्तेमाल की अनुमति, पर्याप्त सेफ्टी किट, और स्थानीय कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने जैसी जरूरी मांगें रखीं।कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी बात सुनने और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के बजाय, प्लांट प्रबंधन ने बिना किसी ठोस कारण के 13 कर्मचारियों को काम से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब कर्मचारियों ने प्रबंधन से इसका कारण पूछा, तो उन पर तोड़फोड़ और बदतमीजी करने जैसे आरोप लगाए गए, जबकि कर्मचारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की शिकायत श्रम विभाग कार्यालय में दर्ज कराई है और न्याय की गुहार लगाई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कोई गलत मांग नहीं कर रहे थे, बल्कि सिर्फ अपनी जान की सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण की मांग कर रहे थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर गरीब और मेहनतकश मजदूरों को अपने हक के लिए यूं ही दर-दर भटकना पड़ेगा। क्या सुरक्षा मांगना अपराध है? क्या मजदूरों की आवाज को दबाकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।

 

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