बिलासपुर

संयुक्त संचालक कार्यालय में मनमानी का बोलबाला, शासन नियमों की धज्जियां उड़ाते अधिकारी, स्थानांतरण आदेशों की अनदेखी और पदोन्नति संलग्निकरण का खेल उजागर

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय में नियमों की अनदेखी और मनमानी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शासन द्वारा जारी किए गए स्थानांतरण आदेशों को न केवल नजरअंदाज किया जा रहा है, बल्कि कुछ कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर “पुरस्कृत” करते हुए पदोन्नति तक दे दी गई है। इससे विभागीय कर्मचारियों में जबरदस्त आक्रोश है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शासन स्तर पर कई कर्मचारियों के स्थानांतरण अन्य जिलों में किए गए थे। लेकिन संयुक्त संचालक (स्वास्थ्य सेवाएं) कार्यालय ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नतीजा यह हुआ कि जिन कर्मचारियों को यहां से जाने का आदेश हुआ था, वे आज तक पुराने कार्यालय में पदस्थ हैं — जबकि कुछ को तो पदोन्नत कर विशेष पदों पर भेज दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने शासन के पारदर्शी प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। सवाल यह उठता है कि आखिर कौन-सी शक्तियां हैं जो नियमों से ऊपर निर्णय ले रही हैं?

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इसी क्रम में, सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी का मामला भी चर्चा में है। उनका स्थानांतरण दूसरे जिले में हुआ था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर कार्यमुक्ति से इंकार कर दिया। अधिकारियों ने भी उन्हें स्थानांतरण स्थल भेजने के बजाय पुनः पुराने पद पर ही कार्यभार सौंप दिया। सूत्र बताते हैं कि यह निर्णय “उच्च स्तर के दबाव” में लिया गया। वहीं, धर्मनगरी क्षेत्र में एक अन्य कर्मचारी को भी मनमाने ढंग से हटाया गया है। इस क्षेत्र में वर्ष में दो बार बड़े धार्मिक मेले आयोजित होते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु आते हैं। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और कर्मचारी- को संलग्निकरन कर कार्यालय में बिठा दिया है जिसके कारण गरीब और जरूरतमंदों तक सरकारी सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं।

 

विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई नियुक्तियां और पदस्थापन ऐसे हैं जिन पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ कर्मचारियों को अनुकंपा नियुक्ति के बाद भी लंबे समय तक बिना जिम्मेदारी के बिठा रखा है, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अगर इन फाइलों और आदेशों की जांच की जाए तो विभाग में गहरी अनियमितताएं सामने आएंगी। यह पूरा खेल संयुक्त संचालक व CMHO कार्यालय के मिलीभगत से हो रहा हैं।

 

नोट: अगले एपिसोड में हम इस मामले से जुड़े दस्तावेज़, फाइल नंबर और विभागीय पत्राचार के साथ साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे जिससे यह स्पष्ट होगा कि शासन के आदेशों को किस तरह से दबाकर “नियमों की आड़ में मनमानी” की जा रही है।

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