बिलासपुर

फर्जी ईडब्लूएस सर्टिफिकेट से राजस्व महकमे मे हड़कंप, 3 छात्राओं ने लिया मेडिकल कॉलेजों मे दाखिला.

(दिलीप जगवानी/जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – फर्जी सर्टिफिकेट से प्रदेश के मेडिकल कालेजों मे ईडब्ल्यूएस कोटे से एडमिशन का मामला प्रकाश मे आया है. कथित फर्जी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बिलासपुर तहसील से जारी किये गए है.राजस्व अधिकारियो ने इससे इंकार किया है और जाँच कि जा रही है.

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प्रदेश के मेडिकल कालेजों में फर्जी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के सहारे एमबीबीएस की सीट हासिल करने का मामला उजागर होने पर जिले के राजस्व अधिकारियो के हाथपाँव फूल गए है. तीन मेडिकल छात्राओं मे से एक बीजेपी नेता की भतीजी है. वही दो अन्य ने भी ईडब्लूएस कोटे से मेडिकल सीट पायी है.जाँच मे कहा जा रहा है आयुक्त चिकित्सा शिक्षा द्वारा भेजी गई सूची में जो 7 नाम मिले है उनमे से तीन नाम पर कोई सर्टिफिकेट बिलासपुर तहसील कार्यालय से जारी नहीं हुआ. फिर सील मुहर साइन का किसने इस्तेमाल किया क्या फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाला कोई गिरोह तहसील मे काम कर रहा है. तीनो ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर से इंकार कर रही तहसीलदार गरिमा सिंह ने जाँच और छात्राओं के बयान से पुष्टि करने कहा है. वे बताती है कि इन सर्टिफिकेट मे ई कोर्ट मे दर्ज नंबर भी है जो कि हैरानी कि बात है. राजस्व अधिकारियो ने दावा किया है कि तीनों के नाम पर तहसील कार्यालय मे कभी कोई आवेदन प्रस्तुत ही नहीं हुआ.इसे गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सम्बंधित अधिकारियो को बुलाकर जानकारी मांगी है. साथ मे कहा जारी सर्टिफिकेट कि जाँच करायी जाएगी.

संजय अग्रवाल (कलेक्टर, बिलासपुर)

 

तहसील के कामकाज से जुड़े लोगो का मानना है फर्जीवाड़े कि जाँच मे ऐसे और मामले पकड़ मे आ सकते है. जाँच के दौरान पाया कि कार्यपालिका दंडाधिकारी का सील लगा है जबकि तहसीलदार के लिए दंडाधिकारी का उपयोग नही किया जाता इससे सर्टिफिकेट के जाली होने कि सम्भावना ज्यादा है. जो सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए उनमें सुहानी सिंह लिंगियाडीह, श्रेयांशी गुप्ता सरकंडा और भाव्या मिश्रा पटवारी गली, सरकंडा शामिल हैं। तीनों ने नीट-यूजी में चयन के बाद ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर एमबीबीएस की सीट हासिल की है. गौरतलब है कि एमसीबी जिला कलेक्टर ने ऐसा एक सर्टिफिकेट फर्जी पाए जाने पर सिम्स के डीन डॉ रमणेश मूर्ति को सम्बंधित स्टूडेंट कि जानकारी दी थी जिस पर करीब पंद्रह दिनों पहले ही ews कोटे से आबंटित सीट रद्द कर दी गईं थी.

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