बेमेतरा

बिलासपुर में स्कूल बसों की बड़ी जांच: 36 बसें अनफिट, 10 पर लगा जुर्माना; चालकों में मिली बीपी-शुगर की समस्या

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर – बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिलासपुर क्षेत्रीय परिवहन विभाग (RTO) और पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई की है। सीपत रोड स्थित ट्रैफिक पार्क लगरामें एक विशेष जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में परिवहन विभाग, जिला पुलिस, यातायात पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने जिले के शैक्षणिक संस्थानों में संचालित स्कूल बसों के दस्तावेजों, मैकेनिकल फिटनेस और चालकों-परिचालकों के स्वास्थ्य का कड़ा परीक्षण किया।

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​212 बसों की जांच, 36 मिलीं अनफिट : शिविर के दौरान कुल 212 स्कूल बसों की गहन जांच की गई। परिवहन विभाग के अनुसार, इनमें से 176 बसें तो निर्धारित मानकों पर खरी उतरीं, लेकिन 36 स्कूल बसें अनफिट पाई गईं। इन अनफिट बसों में सुरक्षा और नियमों की गंभीर अनदेखी सामने आई है, जिसका विवरण इस प्रकार है:

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​सीसीटीवी कैमरा गायब: सबसे ज्यादा 12 बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं वर्किंग या नदारद मिले।

​बिना यूनिफॉर्म ड्राइवर: 09 बसों में चालक बिना तय ड्रेस कोड के वाहन चला रहे थे।

​बिना परमिट: 07 बसें बिना वैध परमिट के सड़कों पर दौड़ती पाई गईं।

​अग्निशमन व प्राथमिक उपचार पेटी की कमी: 04 बसों में न तो आग बुझाने के इंतजाम थे और न ही फर्स्ट-एड बॉक्स।

​टूटे ग्लास व अन्य कमियां: 04 बसों के खिड़की के कांच टूटे हुए थे। इसके अलावा 03 बसें बिना फिटनेस, 02 बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC), 02 बिना लाइसेंस और 02 बिना डी.एल.टी.डी. के पाई गईं।

 

​इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए 10 स्कूल बसों के खिलाफ ई-चालान की कार्रवाई कर कुल 39,900 रुपये का शमन शुल्क वसूला गया है। आरटीओ ने सभी संबंधित स्कूल प्रबंधनों को इन कमियों को सुधारने के लिए केवल 3 दिन का समय दिया है।

 

​चालकों के स्वास्थ्य परीक्षण में चौंकाने वाले खुलासे : ​शिविर में केवल गाड़ियों की ही नहीं, बल्कि उन्हें चलाने वाले 212 ड्राइवरों और कंडक्टरों की सेहत भी जांची गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा किए गए आंख, ब्लड प्रेशर और शुगर टेस्ट में गंभीर बीमारियां सामने आईं:

​29 चालक-परिचालक हाई शुगर से पीड़ित पाए गए।

​23 स्टाफ में बीपी की अनियमितता मिली।

​09 कर्मियों में चर्मरोग और बाकी में सर्दी-जुकाम जैसी आम बीमारियां पाई गईं।

 

​सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन किया, तो बसें होंगी ब्लैकलिस्ट: आरटीओ

 

​जांच के दौरान क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी असीम माथुर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे ने स्कूल संचालकों और चालकों को दो टूक हिदायत दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि स्कूल बसें सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित गाइडलाइंस के मुताबिक नहीं चलाई गईं, तो मोटरयान अधिनियम 1988 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने, परमिट निरस्त करने और फिटनेस कैंसिल करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।जो स्कूल बसें इस जांच शिविर में अनुपस्थित थीं या जिनमें कमियां मिली हैं, उन्हें 15 जुलाई 2026 तक कार्यालयीन समय में आरटीओ ऑफिस बिलासपुर आकर अनिवार्य रूप से अपनी जांच कराने का अंतिम निर्देश दिया गया है।

 

​कार्रवाई में शामिल रही यह टीम​ : इस बड़े अभियान को सफल बनाने में परिवहन विभाग से परिवहन निरीक्षक श्रीमती पारुल ठाकुर, उप निरीक्षक निशिकांत दुबे, पंकज खुटे, जयशंकर राजवाड़े, सहायक वर्ग-2 विकास सिंह ठाकुर, संतनदेव जोगी, करण सोनी और डाटा एंट्री ऑपरेटर श्री वेदराम साहू शामिल रहे। वहीं पुलिस विभाग से उप निरीक्षक विरेन्द्र नेताम, प्रधान आरक्षक ओंकार सिंह सिद्धू, आरक्षक घनश्याम राठौर और गौतम खुसरो ने मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाई।

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