जिला अस्पताल से मशीन गायब, बहरापन जाँचने रायपुर जाने की मज़बूरी

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर के District Early Intervention Centre यानी DEIC में बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 0 से 17 साल के बच्चों और उनके पालकों के लिए यह केंद्र मदद का प्रतीक बनने के बजाय खतरे का कारण बन गया है। जिला अस्पताल से बेरा मशीन (श्रवण बाधित बच्चों के लिए) गायब है, अधिकारियों की चमड़ी इतनी मोटी हो गयी है कि कई बार पूछने पर भी कोई जवाब नहीं दे रहा।
हमने DEIC केंद्र का दौरा किया, जहाँ आवश्यक बेरा मशीन मौजूद नहीं है। समय पर जांच और थैरेपी नहीं मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा है। नोडल अधिकारी सौरभ शर्मा सवालों का जवाब देने में असमर्थ है , जो प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
सूत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि उक्त मशीन वास्तविक मूल्य से काफी अधिक दर पर क्रय की गई है एवम् सिर्फ छोटे बच्चों के श्रवण जांच ही हो पाएगी, जबकि उक्त मूल्य पर सभी आयु वर्ग को लाभ मिल सकता था। धांधली को छुपाने के उद्देश्य से आज दिनांक तक मशीन स्थापित नहीं की गई है
बहरापन जाँचने की मशीन का उपयोग नही करने से अभिभावक अपने छोटे बच्चों को जाँच कराने रायपुर के चक्कर लगाने मजबूर है।
DEIC केंद्रों की यह स्थिति बच्चों की जिन्दगी और स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। प्रशासन और उच्च अधिकारी अब जवाबदेह बनें और DEIC केंद्रों में सुधार तुरंत लागू करें, ताकि बच्चों को उनकी हक की स्वास्थ्य सुविधाएँ समय पर मिल सकें।




