8 करोड़ 14 लाख का धान घोटाला उजागर, राइस मिलर, समिति प्रबंधकों की मिलीभगत, 7 गिरफ्तार

(मनीष नामदेव) : मुंगेली जिले में धान खरीदी और परिवहन व्यवस्था में हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। राइस मिलरों और सहकारी समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से शासन को 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक का नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई आरोपी फरार हैं।
आईसीसीसी मार्कफेड रायपुर से मिले अलर्ट के बाद जब जिला प्रशासन ने जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। जांच में पाया गया कि धान उठाव में लगे वाहनों द्वारा 200 प्रतिशत से लेकर 1116 प्रतिशत तक ओवरलोडिंग कर अवैध परिवहन किया गया, कलेक्टर कुंदन कुमार और पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के निर्देश पर खाद्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए धान खरीदी, परिवहन और पीडीएस वितरण में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
जांच में सामने आया कि राइस मिलरों और समिति प्रबंधकों ने मिलकर
- फर्जी दस्तावेज तैयार किए
- फर्जी वाहन नंबरों से धान परिवहन दिखाया
- बिना जीपीएस वाले वाहनों का उपयोग किया
- पीडीएस चावल का वितरण नहीं किया
इन सभी अनियमितताओं के जरिए शासन को 8 करोड़ 14 लाख रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।प्रशासन के अनुसार लगभग 11 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी और परिवहन में गड़बड़ी के प्रमाण मिले हैं।नवागांव घुठेरा, सिंघनुपरी, छटन और झगरहट्टा उपार्जन केंद्रों में अलग-अलग राइस मिलरों के साथ मिलीभगत कर बड़े पैमाने पर अवैध परिवहन किया गया।
अब तक गिरफ्तार आरोपियों में अब्दुल सत्तार, विकास पांडेय, महावीर जैन, संतोष साहू, श्रीधर परिहार, मोहम्मद यूसुफ और गेंदलाल साहू शामिल हैं।वहीं अब्दुल समद, अनिल जांगड़े, ललित जैन और नावेद मेनन फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।
इसके अलावा थाना फास्टरपुर और थाना लालपुर में भी अलग-अलग अपराध क्रमांक के तहत धोखाधड़ी और फर्जी परिवहन के मामले दर्ज किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।प्रशासन ने साफ किया है कि धान खरीदी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।




