बिलासपुर

स्थानांतरण नीति 2025 की उड़ रहीं धज्जियां, बिलासपुर सीएमएचओ कार्यालय में मनमानी का खेल, शासन की नीति को ठेंगा दिखा रहे अधिकारी!

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग की स्थानांतरण नीति 2025 पर सवाल उठने लगे हैं। शासन की साफ नीयत और पारदर्शी व्यवस्था को विभाग के ही जिम्मेदार अधिकारी खुलकर चुनौती दे रहे हैं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय बिलासपुर में न तो संलग्नीकरण आदेश समाप्त किए गए हैं और न ही स्थानांतरित कर्मचारियों को अब तक कार्यमुक्त किया गया है। शासन के निर्देशों के बावजूद, फाइलों में दिखावे की कार्रवाई और मैदान में मनमानी दोनों साथ-साथ चल रही हैं।

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एक ओर मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं विभाग के भीतर कुछ अधिकारी अपनी मर्जी का राज चला रहे हैं। इनके द्वारा स्थानांतरण के बाद भी पसंदीदा कर्मचारियों को सीएमएचओ कार्यालय और जिला मुख्यालय में ही बनाए रखा गया है, ताकि कार्यालयी भ्रष्टाचार की जड़ें बनी रहें।

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स्थानांतरण नीति 2025 के बिंदु 3.17 में स्पष्ट लिखा है कि संलग्नीकरण एवं कार्यादेश स्वमेव समाप्त माने जाएंगे और स्थानांतरण किए गए कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाएगा। लेकिन बिलासपुर के सीएमएचओ कार्यालय में यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित है।

 

संलग्न कर्मचारियों की सूची जिन पर उठ रहे सवाल :1. महेन्द्र साहू – (शहरी खण्ड चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर→सीएमएचओ कार्यालय)
2 .शिशिर आर. चेरियन – ( सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा→ सीएमएचओ कार्यालय)
3. शशांक वर्मा – सहायक ग्रेड-3 (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़सरा बिल्हा → सीएमएचओ कार्यालय)
4. ठा. भानू राठौर – एमपीडब्ल्यू ( शास. दवाखाना गांधीचौक सीएमएचओ कार्यालय)
5. श्यामू सोनी – सहायक ग्रेड-3 ( प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लिंगियाडीह→ सीएमएचओ कार्यालय)6. डॉ. सौरभ शर्मा – चिरायु चिकित्सक संविदा (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा → cmho बिलासपुर )
7. आर.पी. शर्मा – नेत्र सहायक अधिकारी (पी एच सी लूथरा मस्तूरी → सीएमएचओ कार्यालय)
8. जितेन्द्र गहवई – नेत्र सहायक अधिकारी (सीएमएचओ कार्यालय से बंधवापारा)

विशेष मामला सुदूर क्षेत्र कहलाते है वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं ठप : है, समीक्षा विश्वकर्मा, जिन्हें पीएचसी से जिला चिकित्सालय में “अतिशेष” दिखाकर रखा गया है, उनकी वास्तविक सेवाओं की जरूरत सुदूर आदिवासी क्षेत्र – प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (कोटा ब्लॉक) में है, और भी जिले के तीन ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जो इस समय पूरी तरह खाली पड़ा है।

 

इस एक उदाहरण से स्पष्ट है कि जिन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है, वहां कर्मचारी नहीं, और जहां जरूरत नहीं है, वहां संलग्नता के नाम पर भीड़ बढ़ाई जा रही है।

कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डिलीवरी सेवाएं बंद हैं, राष्ट्रीय कार्यक्रम अधर में लटके हैं और ग्रामीण-आदिवासी क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तरस रहे हैं। क्या शासन की स्थानांतरण नीति 2025 सिर्फ दिखावे की नीति बनकर रह गई है? और कब होगी उन अधिकारियों पर कार्रवाई जो विभाग को अस्वस्थ बनाए रखने की साजिश में जुटे हैं?
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कौन हैं वो अधिकारी जो संलग्नीकरण के इस खेल के सूत्रधार हैं, और कैसे बन रहा है भ्रष्टाचार का नेटवर्क? देखिए अगले एपिसोड में स्वास्थ्य विभाग के अंदर की बीमारी का एक्स-रे रिपोर्ट!

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