बिलासपुर

सीएम सर, कोटा भी आइए….नायब तहसीलदार राकेश ठाकुर माँग रहे रिश्वत, 2 लाख कहा से लाऊ!

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए तपती दुपहरी में प्रदेश के गांव-गांव घूम रहे हैं। जहां वे जा रहे हैं उन गांवों में रहने वालों का सौभाग्य है कि उनकी समस्याएं हल हो रही है लेकिन जहां वे नहीं जा रहे हैं वहां के लोगों की गुहार कौन सुनेगा।

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प्रदेश के गांव-गांव में अफसरशाही का आलम कैसा है, प्रशासनिक अत्याचार के सामने लोग कैसे बेबस, निरीह, दीनहीन है इसका उदाहरण नीचे पढ़िए।श्रीमति रामबाई गोंड़ रेलवे के केंद्रीय अस्पताल में आया थीं। 26 जुलाई 2023 को रामबाई की मृत्यु हो गई। उसने नॉमिनेशन में किसी का नाम नहीं लिखा था इसलिए रेलवे ने उसकी इकलौती पुत्री प्रीति से कहा कि वह राजस्व विभाग या किसी सक्षम न्यायालय से उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र ले आए।

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रामबाई औऱ प्रीति दोनों कोटा तहसील निवासी हैं, लिहाजा प्रीति ने यहां के नायब तहसीलदार के कोर्ट में अर्जी लगाई। इस अर्जी के जवाब में नायब तहसीलदार, कोटा ने 11 दिसंबर 2024 को एक ईश्तहार जारी कर कहा कि यदि प्रीति के रामबाई की उत्तराधिकारी होने पर किसी को आपत्ति हो तो वो 10 जनवरी 2025 तक मेरे समक्ष आवेदन करे। 10 जनवरी बीत गई, लेकिन कोई आपत्ति नहीं हुई।

प्रीति को भी नोटिस जारी कर 10 जनवरी को कागजात जमा करने कहा गया। उसने पूरे कागजात जमा कर दिए। अब नियमतः उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र जारी हो जाना था, लेकिन शुरू हुई डिमांड।

नायब तहसीलदार राकेश ठाकुर

पहले कहा गया 2 लाख दो फिर प्रमाण पत्र देंगे। प्रीति गोंड़ को रेलवे से जो राशि मिलनी थी वह करीब 7 लाख रुपए थी। अब इसमें से 2 लाख कैसे दे। वो रोई-गिड़गिड़ाई तो साहब ने राशि 1 लाख कर दी और चार माह तक अलग-अलग कारणों से घुमाते रहे लेकिन जब प्रीति ने इसे भी देने से इंकार किया तो कल 19 मई को उसका आवेदन यह कहकर खारिज कर दिया कि आपका आवेदन इस न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर है।

नायब तहसीलदार को यह ज्ञान छह माह बाद हुआ कि जिस आवेदन पर उसने ईश्तहार निकाला, नोटिस दिया, उसे सुनने का अधिकार ही उसे नहीं है। हो सकता है कि यह ज्ञान उस डिमांड के पीछे छिपा हो जो पूरी नहीं हुई तो प्रकट हो गया। नायब तहसीलदार के इस ‘सुशासन’ से एक बेटी को अब पता नहीं कितने महीने और अपनी मां के पैसों के लिए धक्के खाने पड़ेंगे।

 

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