बिलासपुर

मिस्टिंग मशीन की खामोशी से यात्री हलाकान, रेलवे प्रबंधन बेपरवाह.

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर –  रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को भीषण गर्मी से राहत मिलने का इंतजार ख़त्म नहीं हो रहा। तपते मौसम मे मिस्टिंग मशीनों से ठंडी फुहारें फूटनी चाहिए थी, वहां अभी तक सिर्फ गर्म हवा और उमस से यात्री बेचैन है।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन, जो दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का जोनल मुख्यालय भी है,बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझता नजर आ रहा है। 43 डिग्री सेल्सियस की झुलसाती गर्मी में भी न मिस्टिंग मशीन चल रही है और न ही पंखे ढंग से काम कर रहे हैं। नियम के मुताबिक 15 अप्रैल से मिस्टिंग मशीनों को शुरू किया जाना था। लेकिन महीना पूरा होने को है स्टेशन पर खड़े यात्री खामोश मशीन को तक रहे हैं।

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हालत इतनी खराब है कि बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। हर आंखें अब राहत की तलाश में मिस्टिंग मशीनों की ओर टिकी हैं, लेकिन वहां भी जवाब ‘बंद’ है। रेलवे प्रशासन की लापरवाही साफ दिखती है। नोजल जाम हैं, पानी की सप्लाई ठप है. समय रहते मरम्मत का काम भी पूरा नहीं हुआ। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कई बार मांग की है कि मशीनों को तुरंत शुरू किया जाए और पंखों की भी मरम्मत कराई जाए। लेकिन अब तक सिर्फ वादे हो रहे हैं। सिर्फ गर्मी ही नहीं, ट्रेनों की लेटलतीफी भी यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा रही है। सात से आठ घंटे तक ट्रेन का इंतजार कर यात्रियों का सब्र जवाब देने लगा है। फिलहाल स्टेशन पर यात्रियों को ‘राहत की फुहार’ नहीं, ‘पसीने की बौछार’ मिल रही है।

 

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