बिलासपुर

तीन दिनो में 1912 और मोर बिजली एप पर हुए 18 हजार कॉल रजिस्टर्ड, आंधी बारिश की कहर से हुई थी बिजली गूल, अब लाइन दुरूस्त करने की कवायद

(उषा सोनी) : बिलासपुर। तेज आंधी और बारिश के चलते शहर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के सभी कई इलाकों में पेड़ों की डालियां और डंगाल बिजली तारों पर गिरने से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित रही। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उपभोक्ताओं ने लगातार बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबर 1912 और मोर बिजली एप पर शिकायतें दर्ज कराईं। बिजली विभाग के अनुसार पिछले तीन दिनों में 1912 हेल्पलाइन और मोर बिजली एप पर करीब 18 हजार कॉल और शिकायतें दर्ज की गईं। बताया यह भी जा रहा है कि एक ही फाल्ट के संबंध में अलग-अलग क्षेत्रों से कई बार कॉल आने के कारण शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ती रही। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर पेड़ों की बड़ी डालियां तारों पर गिर गई थीं, जिससे बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं और आपूर्ति बाधित हुई।

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एके अंबष्ट कार्यपालक निदेशक बिलासपुर क्षेत्र ने बताया कि विभाग की टीम लगातार सुधार कार्य में जुटी हुई है। शहर के विभिन्न इलाकों में गिरे डंगाल और पेड़ों की शाखाओं को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। बिजली तारों से लिपटी डालियों को अलग कर लाइन दुरुस्त की जा रही है ताकि जल्द से जल्द बिजली बहाल हो सके। इस कार्य में बिजली विभाग के ठेकेदार लगातार जुटे हैं जिसमें नगर निगम के कर्मचारियों का भी सहयोग लिया जा रहा है।

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बता दें कि 6 मई की शाम आई तेज आंधी और बारिश के बाद शहर और आसपास लाइट की व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो गई थी। चारों तरफ अंोरा छाया था और कई जगहों पर लो वोल्टेज की भी समस्या रही। बिजली का तार टूटकर पेंड़ पर गिर गया था कई जगहों पर डगाल भी पेंड़ से अलग हो गया था, जो जानमाल के लिए खतरा बन गया था।बिजली गुल होने से शहर वासियों को न केवल गर्मी का सामना करना पड़ा बल्कि पानी के लिए भी लोग तरसते रहे, मौसम खराब होने के कारण कई जगह एक साथ फाल्ट आए, जिससे समस्या बढ़ी।

 

शहर में तीन दिन पहले आई भीषण आंधी और बारिश के बाद जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। स्मार्ट सिटी कहलाने वाले शहर के कई इलाके अब भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। जगह-जगह पेड़ गिरने, डालियां टूटने और 11 केवी बिजली तारों के क्षतिग्रस्त होने से खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कई स्थानों पर बिजली के खंभे भी झुक गए हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। शहर के राजकिशोर नगर, चिल्हाटी, मंगला और मोपका क्षेत्रों में बिजली संकट के साथ पानी की समस्या भी गहरा गई है। लोग टैंकर के भरोसे पानी जुटाने को मजबूर हैं। वार्ड 47 के पार्षद मोहन श्रीवास ने बताया कि क्षेत्र में पहले से पानी की समस्या थी, लेकिन अब बिजली गुल होने के कारण मोटर पंप भी बंद पड़े हैं, जिससे हालात और खराब हो गए हैं। कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भी बिजली बहाल नहीं हो सकी है।

 

महिलाओं ने किया पार्षद निवास का घेराव : मंगला बस्ती के बिजली और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। वार्ड नंबर 13 के बुधवार रात शहर के दीनदयाल कालोनी के अधिकतर क्षेत्र में लाइट थी आधी में लाइट गूल..। जिसकी वजह से उक्त क्षेत्र की महिलाओ ने पार्षद के निवास का घेराव कर दिया था। पार्षद रमेश पटेल ने बताया कि धुरीपारा आंगनबाड़ी से नदी की ओर जाने वाली तार नीचे जमीन की ओर हो गया है, खंभा टूट गया है और कई जगहों पर तार टूटकर लटक रहा है लेकीन संबंधित बिजली अधिकारियों को बार बार सूचना देने के बाद भी अब तक लाइट की स्थिति बहाल नही हो सकी है।क्षेत्र में पानी की भी समूचित व्यवस्था नही हो पा रही है।

 

आमजनता बिजली विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की बेरूखी से भी परेशान है उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी फोन नहीं उठा रहे हैं। टोल फ्री नंबर पर भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। शहर के कई हिस्सों में टूटे पेड़ों की डालियों पर बिजली के तार लटके हुए हैं, जो किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।

 

27 खोली निवासी प्रो. मनीष दीवान ने भी बताया कि वे दो दिनों से लगातार बिजली विभाग को शिकायत भेजकर मुंगेली नाका, मीना बाजार और कुदुदंड क्षेत्र में खतरनाक रूप से नीचे झुके एलटी केबल की जानकारी दे रहे हैं, लेकीन विभाग को शायद बड़े खतरे का इंतजार है। क्षेत्र में कई जगह तार टीन शेड और खपरैल मकानों को छू रहे हैं, जिससे आग लगने या करंट फैलने का खतरा बना हुआ है। बहरहाल यह स्थिति आज पूरे शहर में बनी हुई है और नागरिकों की यही मांग की है कि बिजली विभाग तत्काल सुधार कार्य शुरू करे, ताकि किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।

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