पहली बारिश में तैर गयी पुरानी तस्वीरें, शहर के इलाके जलमग्न.

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर में रविवार की शाम तेज बारिश ने एक बार फिर नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। महज एक से डेढ़ घंटे की बारिश में शहर की सड़कों ने नालों का रूप ले लिया जहां लोग सफर नहीं,जलयात्रा कर रहे थे। बिना टिकट की ये यात्रा मुफ्त ज़रूर थी, लेकिन खतरे से भरी हुई।
ये बिलासपुर की सड़कों की तस्वीरें है जहां रविवार शाम की बारिश ने विकास के दावों को बहा दिया। श्रीकांत वर्मा मार्ग से लेकर सरकंडा, तालापारा, दयालबंद, और कुदुदंड तक, हर मोहल्ला पानी में डूब गया। श्रीकांत वर्मा मार्ग की हालत तो सबसे ज्यादा बदतर रही। घुटनों तक भरा पानी, बंद होती बाइकें, और लौटते कदम ये किसी भी स्मार्ट सिटी की पहचान नहीं हो सकती। नालियां ओवरफ्लो होकर सड़क पर इस तरह बह रहीं थीं जैसे प्रशासन ने उन्हें खुला छोड़ दिया हो। शायद इसे ‘विकास की धारा’ मानकर। तालापारा की शरफू गली की कहानी हर साल दोहराई जाती है।
यहां तो पानी सिर्फ सड़कों तक नहीं, बल्कि घरों के अंदर तक पहुंच गया। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को गंदे, कीचड़ भरे पानी में चलना पड़ा। रहवासियों का कहना है कि शिकायतें दी गईं, मगर समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला। न सिर्फ सड़कें, बल्कि बिजली व्यवस्था भी इस बारिश में बह गई। बारिश शुरू हुई नहीं कि बिजली गुल हो गई कटआउट बॉक्स पानी में डूब गए और करेंट का खतरा सिर पर मंडराने लगा।
पत्रकार कॉलोनी और स्वर्ण जयंती नगर में चार खुले कटआउट बॉक्स बारिश के पानी में डूबे हुए नजर आए। ऐसा मंजर देखकर लोग सहम गए। कहीं करेंट ना आ जाए ये डर हर किसी के चेहरे पर साफ नजर आया। स्थानीय लोग वर्षों से इस समस्या को उठा रहे हैं, लेकिन बिजली विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है। बिलासपुर की ये तस्वीरें डराने वाली हैं। जब एक घंटे की बारिश में ये हाल है, तो मानसून में क्या होगा? प्रशासन को अब जगना होगा वरना अगली बारिश सिर्फ जलयात्रा नहीं, किसी बड़ी दुर्घटना की गवाही बन सकती है।




