लाखो रुपये लार्वा कंट्रोल में फूंक रहे,लेकिन मच्छर नहीं मरे

(आशीष मौर्य/मयंक सिंह क्षत्रिय) : बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र और इससे जुड़ी 18 पंचायतों में मच्छरों का आतंक इन दिनों चरम पर है। हालत यह है कि लोग दिन में भी मच्छरों के काटने से परेशान हैं। वहीं नगर निगम की ओर से फॉगिंग और लार्वा नियंत्रण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद नालों की सफाई नहीं हो रही और शहर के स्लम और आउटर एरिया में हालात बदतर बने हुए हैं।
नगर निगम ने जनवरी 2021 से दिसंबर 2023 तक फॉगिंग के लिए 1.59 करोड़ रुपए का पेट्रोल और 3.27 करोड़ रुपये का डीजल खर्च किया। कुल मिलाकर यह राशि 4.86 करोड़ रुपये से अधिक होती है। इसके बावजूद वार्डों में नियमित फॉगिंग नहीं हो रही है । नागरिकों ने बताया कि फॉगिंग मशीनें कई-कई दिनों तक उनकी गलियों में दिखाई नहीं देतीं। कोटा क्षेत्र में मलेरिया से 4 मौतों हुई है। वहीं नगर निगम के वार्डों से भी डेंगू और वायरल बुखार के मामलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मच्छरों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि शाम होते ही लोग घरों के बाहर बैठने से डरते हैं।
शहर के 70 वार्डों के लिए निगम के पास महज 15 फॉगिंग मशीनें हैं, जिनमें से आधी VIP इलाकों में ही रिजर्व रहती हैं। स्लम और आउटर एरिया के लोगों को नियमित फॉगिंग और एंटी लार्वा दवा के छिड़काव जैसी जरूरी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। हर महीने निगम पेट्रोल-डीजल में 40 से 50 लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन इसका लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है।
संसाधनों की कमी के कारण लोगो को राहत नहीं मिल पा रहा है । फॉगिंग मशीनों की संख्या बढ़ाने और एंटी लार्वा छिड़काव को व्यापक स्तर पर लागू करने की जरूरत है, ताकि महामारी जैसी स्थिति से बचा जा सके। जनता अब निगम से जवाब मांग रही है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो फिर मच्छरों पर नियंत्रण क्यों नहीं हुआ? क्या यह राशि सिर्फ कागजों पर ही खर्च हुई?




