हीट स्ट्रोक से मादा भालू की मौत, वन्यजीवों पर बढ़ा खतरा

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान का असर अब जंगल के वन्यजीवों पर भी पड़ने लगा है। बिलासपुर वन वृत्त के मरवाही वनमंडल में लू की चपेट में आने से एक पांच वर्षीय मादा भालू की मौत हो गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हीट स्ट्रोक से मौत की पुष्टि हुई है। खास बात यह है कि जिस इलाके में यह घटना हुई है, वहां भालू के अलावा हिरण, चीतल, सांभर, वनभैंसा, तेंदुआ,हाथी और बाघ जैसे कई दुर्लभ वन्यजीव भी विचरण करते हैं। ऐसे में यह घटना वन्यजीव संरक्षण को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।
मरवाही रेंज के पिपरिया गांव से लगे जंगल के कक्ष क्रमांक 1975 में ग्रामीणों ने मादा भालू का शव देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। शुरुआत में शिकार की आशंका जताई गई थी, लेकिन जांच में भालू के सभी अंग सुरक्षित पाए गए और किसी तरह के शिकार के प्रमाण नहीं मिले। पंचनामा कार्रवाई के बाद पशु चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम कराया गया। रिपोर्ट में मौत का कारण लू बताया गया। इसके बाद अधिकारियों की मौजूदगी में मादा भालू का अंतिम संस्कार किया गया। वन विभाग का कहना है कि घटनास्थल के आसपास पर्याप्त जलस्त्रोत मौजूद हैं, लेकिन अत्यधिक गर्मी और तापमान के कारण यह घटना हुई है।
मरवाही वनमंडल का यह इलाका जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मरवाही वनमंडल में लू से मादा भालू की मौत ने यह साफ कर दिया है कि बढ़ता तापमान अब जंगल के जीवों के लिए भी गंभीर संकट बन चुका है। इस वन क्षेत्र में हिरण, चीतल, सांभर, वनभैंसा, भालू, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे में एक भालू की हीट स्ट्रोक से मौत इस बात का संकेत है कि यदि गर्मी का प्रकोप इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में अन्य वन्यजीव भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। वन्यजीवों के लिए अब शिकार से ज्यादा बड़ा खतरा भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन बनता दिखाई दे रहा है। इस संवेदनशील वन क्षेत्र में हुई मादा भालू की मौत ने वन्यजीवों को भीषण गर्मी से बचाने की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।




