बिलासपुर

EXCLUSIVE : देवरीखुर्द लैंड स्कैम: राजस्व की ‘तकनीकी चूक’ बनी भूमाफियाओं का हथियार, 29 साल पहले बिक चुकी जमीन की फिर हुई फर्जी रजिस्ट्री

(आशीष मौर्य संपादक) : ​​बिलासपुर। न्यायधानी के देवरीखुर्द क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर जमीन दलालों ने जालसाजी का एक सनसनीखेज खेल खेला है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर एक ही जमीन को दो बार बेचने का मामला सामने आया है। इस खेल में न केवल मूल भूस्वामी के वारिसों को गुमराह किया गया, बल्कि शासन के ऑनलाइन रिकॉर्ड की त्रुटियों को हथियार बनाया गया।

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शशि बाई रजक ने वर्ष 1992 मे भूमि क्रय किया

​क्या है पूरा मामला? : मामले की जड़ें साल 1987 से जुड़ी हैं। मूल भूस्वामी सरस्वती बाई ने देवरीखुर्द में एक भूखंड खरीदा था,12 मार्च 1992 को सरस्वती बाई के निधन के बाद, उनके तीन बेटों अजय, विजय और संजय ने नियमानुसार फौती नामांतरण कराया और 23 नवंबर 1992 को खसरा नम्बर 98/14 यह 1308 वर्गफुट जमीन शशि बाई रजक को बेच दी। शशि बाई तब से इस जमीन की वैधानिक मालिक हैं।

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गलत प्रविष्टि का फायदा उठाकर दोबारा फौती नामांतरण कराकर उसी जमीन को उर्मिला गुलहरे नामक महिला को बेच दिया.

​साजिश: 29 साल बाद हुई फर्जी रजिस्ट्री : ​जमीन दलालों की नजर देवरिखुर्द के उन खसरा नंबरों पर है, जो तकनीकी खराबी के कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक ही व्यक्ति के नाम पर दो बार दर्ज दिख रहे हैं। इसी का फायदा उठाकर दलालों ने सरस्वती बाई के नाम राजस्व रिकॉर्ड मे दर्ज फर्जी प्रविष्टि खसरा नम्बर 98/03 रकबा 1308 वर्ग फुट जमीन को दोबारा बेचने उसके बेटे संजय को प्रलोभन में लिया।​दलालों ने साल 2021 में​सरस्वती बाई का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया।​फर्जी ऋण पुस्तिका बनवाई।​दोबारा फौती नामांतरण कराकर उसी जमीन को उर्मिला गुलहरे नामक महिला को बेच दिया।

तत्कालीन तहसीलदार कि जाँच रिपोर्ट मे खुलासा, उर्मिला गुलहरे ने नाम पर दूसरे से ख़रीदा गया भूमि सही प्रतीत नहीं होता….

तत्कालीन ​तहसीलदार की जांच में खुला राज : ​जब पीड़िता शशि बाई रजक को 2021 में इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो उन्होंने तत्काल जमीन के सीमांकन हेतु आवेदन किया।उसी जमीन को खरीदने वाली उर्मिला गुलहरे ने इस सीमांकन प्रक्रिया में आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन टीम सीमांकन के बाद जांच के दौरान सच सामने आ गया।तत्कालीन तहसीलदार अतुल वैष्णव ने दस्तावेजों के सूक्ष्म परीक्षण और आपत्ति के निराकरण के बाद स्पष्ट कर दिया कि जमीन के असली हकदार शशि बाई रजक ही हैं।

वर्ष 2021 मे बनया गया फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जिसके आधार पर 29 साल बाद फ़ौती उठाकर नामांतरण कराया गया.

​लोकस्वर का खुलासा:पहले भी हो चुकी है FIR : ​गौरतलब है कि ‘लोकस्वर’ ने पहले भी इस तरह के सिंडिकेट का पर्दाफाश किया था। करीब एक वर्ष पूर्व, इसी तरह के एक मामले में सिविल लाइन पुलिस ने जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम के खिलाफ FIR दर्ज की थी, जिसने कूट रचित दस्तावेजों के सहारे एक ही जमीन को 4 अलग-अलग लोगों को बेच दिया था।​अब एक बार फिर वही कार्यप्रणाली सामने आई है। राजस्व विभाग की लापरवाही और ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामियां भू-माफियाओं के लिए ‘वरदान’ साबित हो रही हैं, जिससे आम जनता की जमा-पूंजी और संपत्ति खतरे में है।

फर्जी प्रविष्टि

दस्तावेज चिल्ला रहे हैं ‘धोखा’, पर अधिकारी हैं ‘मौन’ : राजस्व महकमे से सहयोग न मिलने पर लोकस्वर ने आधिकारिक नक़ल शाखा से जमीन के पुराने रिकॉर्ड और खसरे की प्रविष्टियां निकलवाईं। इन दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच में स्पष्ट हो गया कि तकनीकी त्रुटि का फायदा उठाकर किस तरह फर्जी ऋण पुस्तिका और मृत्यु प्रमाण पत्र का सहारा लिया गया.

सही प्रविष्टि

देवरीखुर्द जमीन फर्जीवाड़े में अब उच्चाधिकारियों ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। न्याय के लिए भटक रही पीड़िता शशि बाई रजक ने अंततः मामले की लिखित शिकायत बिलासपुर आईजी और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से की है।पुलिस उन भू-माफियाओं, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले सिंडिकेट और उन कड़ियों की पड़ताल कर रही है जिन्होंने इस धोखाधड़ी में मौन रहकर सहयोग किया है।

 

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