सिम्स में फायर सेफ्टी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, 664 अग्निशमन सिलेंडरों की जांच, आपदा प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) चिकित्सालय में मरीजों, परिजनों एवं स्टाफ की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह द्वारा अस्पताल परिसर का विस्तृत औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान फायर सेफ्टी से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं—अग्निशमन उपकरण, अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर एवं आपातकालीन निकासी मार्ग—का गहन परीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को जानकारी दी गई कि सिम्स चिकित्सालय में एबीसी (ABC) एवं CO2 गैस से भरे कुल 664 अग्निशमन सिलेंडर विभिन्न वार्डों, ओपीडी, आपातकालीन इकाइयों एवं संवेदनशील स्थानों पर स्थापित हैं। अधिष्ठाता एवं चिकित्सा अधीक्षक ने मौके पर ही इन सिलेंडरों की कार्यक्षमता, प्रेशर लेवल, फिटनेस एवं वैधता अवधि (एक्सपायरी) की बारीकी से जांच की। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक सिलेंडर की नियमित जांच, समय पर रिफिलिंग एवं उचित स्थान पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपयोग किया जा सके।
अस्पताल के अति संवेदनशील विभागों—NICU (नवजात गहन चिकित्सा इकाई) एवं PICU (बाल गहन चिकित्सा इकाई)—में विशेष सतर्कता बरती गई। यहां स्थापित फायर अलार्म सिस्टम एवं स्मोक डिटेक्टर की कार्यशीलता की जांच की गई, जिससे किसी भी प्रकार के धुएं या आग की स्थिति में तुरंत अलर्ट मिल सके। इसके अतिरिक्त पूरे अस्पताल परिसर में लगे ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम का भी निरीक्षण किया गया, जो आग लगने की स्थिति में स्वतः सक्रिय होकर आग को फैलने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निरीक्षण के दौरान आपातकालीन निकासी मार्गों (इमरजेंसी एग्जिट) की स्थिति का भी जायजा लिया गया। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि सभी एग्जिट मार्ग पूरी तरह से साफ, सुगम एवं अवरोधमुक्त रहें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में मरीजों एवं स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इसके साथ ही फायर सेफ्टी संकेतक (साइन बोर्ड) स्पष्ट एवं दिखाई देने योग्य स्थानों पर लगाए जाने पर भी जोर दिया गया।
निरीक्षण उपरांत एक आपात बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. ओ.पी. राज, अमित ठाकुर, डॉ. समीर पैकरा, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट स्वाति कुमार, उज्जवला दास, पिंकी दास एवं पुष्पलता शर्मा, गरिमा पांडे, उत्कर्ष शर्मा राकेश ठाकुर कमलेश दीवान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
बैठक में अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स जैसे बड़े संस्थान में प्रतिदिन हजारों मरीजों का आवागमन होता है, ऐसे में फायर सेफ्टी व्यवस्था का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों को नियमित रूप से फायर सेफ्टी प्रशिक्षण दिया जाए तथा समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को परखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक विभाग में जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति कर फायर सेफ्टी उपकरणों की निगरानी सुनिश्चित की जाए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरणों का नियमित ऑडिट किया जाए तथा किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी या कमी पाए जाने पर उसे तत्काल दूर किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग और रखरखाव ही किसी भी आपदा से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि फायर सेफ्टी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कर्मचारियों के साथ-साथ मरीजों एवं उनके परिजनों को भी समय-समय पर आवश्यक जानकारी दी जाएगी। इसके तहत सूचना पट्ट, दिशा-निर्देश एवं सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
सिम्स प्रबंधन द्वारा किए गए इस व्यापक निरीक्षण एवं समीक्षा का मुख्य उद्देश्य अस्पताल की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इस पहल से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी आगजनी या आपात स्थिति में त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके तथा सभी की सुरक्षा सुनिश्चित हो।




