EXCLUSIVE : कलेक्टर साहब….जमीन दलाल से साठगांठ करने देवरीखुर्द पटवारी राकेश साहू का ये खेल देखिये.. ऐसे पटवारी के रहते कैसे मिलेगा पीड़ितों को इंसाफ

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर – देवरीखुर्द की जमीनों को फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेचने वाले जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम के खिलाफ एसडीएम और नायब तहसीलदार ने जाँच बैठा दी है. लोकस्वर मे मामले का खुलसा होने के बाद राजस्व महकमे मे हड़कंप मचा हुआ है.


जमीन दलाल और 420 का आरोपी बजरंग प्रसाद गौतम ने मौजा देवरिखुर्द की खसरा नम्बर 38/12,खसरा नंबर 133/130,खसरा नंबर 133/10, खसरा नंबर 37/66, खसरा नंबर 135/6 की जमीनों को फर्जी दस्तावेज तैयार कर बेच दिया. मामले मे जाँच के आदेश होने पर नायब तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने सभी मामले मे जाँच कर रिपोर्ट देने हल्का पटवारी देवरीखुर्द 43 राकेश साहू को कहा.जो गोपनीय जाँच रिपोर्ट नायब तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा के टेबल तक पहुचनी थी.

हल्का पटवारी राकेश साहू ने जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम को भिजवा दिया, ताकी उस रिपोर्ट को देखकर वह उससे मिलने आए. लोकस्वर के हाथ वो गोपनीय जाँच रिपोर्ट लगी है, जिसमे सील सिग्नेचर होना सिर्फ बच गया था. नायब तहसीलदार को संबोधित करते हुए बनी जांच रिपोर्ट देवरीखुर्द पटवारी राकेश साहू ने अधिकारियों तक पहुंचाने से पहले गुपचुप तरीके से सार्वजनिक कर दी.


देवरीखुर्द पटवारी राकेश साहू ने किया था डिजिटल सिग्नेचर:- जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम ने जमीन का का फर्जीवाड़ा ऐसे ही नहीं कर लिया, इसमें तत्कालीन और वर्त्तमान पटवारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम ने मृत व्यक्ति के नाम पर दूसरे आदमी को खड़ा कर जमीन बेच दी है.

गोपनीय जाँच रिपोर्ट पहुंची जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम तक :- इस पूरे मामले में देवरीखुर्द पटवारी राकेश साहू ने जो जांच रिपोर्ट तैयार की, उसको नायब तहसीलदार के पास भेजने से पहले, जमीन दलाल बजरंग प्रसाद गौतम तक पंहुचा दिया. ताकी जमीन दलाल,पटवारी से मिलने पहुंचे.और मामले को लेनदेन कर कमजोर या रफा दफा किया जा सके.

नायब तहसीलदार ने लगाई पटवारी को फटकार:-लोकस्वर के हाथ जो जाँच रिपोर्ट लगी है. उस मामले में नायब तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने देवरीखुर्द पटवारी राकेश साहू को जमकर फटकार लगाई है. पटवारी की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है.पटवारी राकेश साहू की कार्यशैली को देखते हुए, यह तो साफ है कि जमीन दलाल को बचाने प्रयास शुरू हो गए हैं. जबकि अपनी जमा पूंजी लगाकर जमीन खरीदने वाले लोग न्याय के लिए अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं.





