छत्तीसगढ़ को मिला पहला रामसर साइट: कोपरा जलाशय में बर्ड वॉक और संगोष्ठी का आयोजन

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : छत्तीसगढ़ के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। राज्य को उसका पहला रामसर साइट मिल गया है। बिलासपुर जिले के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि यानी रामसर साइट के रूप में मान्यता मिलने के बाद यहां बर्ड वॉक और संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा बिलासपुर वनमंडल के अंतर्गत कोपरा जलाशय में बर्ड वॉक एवं संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू शामिल हुए। इस अवसर पर तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष रजनीश सिंह, महापौर पूजा विधानी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक अरुण कुमार पांडेय, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, सीसीएफ मनोज पांडेय, डीएफओ सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन्यजीव प्रेमी और बर्ड वॉचर्स बड़ी संख्या में मौजूद रहे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि आज का दिन बिलासपुर ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। कोपरा जलाशय को रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए दलदली और आर्द्र क्षेत्रों को संरक्षित करने का निर्णय लिया गया, और उसी के तहत कोपरा जलाशय को रामसर सूची में शामिल किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन मंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से छत्तीसगढ़ को पहला रामसर साइट मिला है। कोपरा जलाशय हर साल हजारों किलोमीटर की यात्रा तय कर आने वाले प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय स्थल है, जहां उन्हें भोजन और संरक्षण मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पक्षी संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और भविष्य में इको-टूरिज्म की संभावनाओं पर चर्चा की। संगोष्ठी का उद्देश्य कोपरा जलाशय को संरक्षित रखने, अधिक से अधिक पक्षियों को आकर्षित करने और इसे एक मॉडल इको-टूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने की दिशा तय करना रहा। कुल मिलाकर, कोपरा जलाशय को रामसर साइट का दर्जा मिलना छत्तीसगढ़ की पर्यावरणीय पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा और आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।




