डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर विद्युत विभाग के रिटायर्ड अधिकारी से 36.97 लाख की ठगी, मामला दर्ज

रायगढ़ में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर विद्युत विभाग के एक सेवानिवृत्त परिवेक्षक से करीब 37 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को टेलीकॉम अधिकारी, पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। मामला साइबर थाना रायगढ़ में दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
यह पूरा मामला 14 जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जब पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात महिला का कॉल आया। उसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी Telecom Regulatory Authority of India से जुड़ा अधिकारी बताया और कहा कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल कर जियो का नंबर लेकर गलत गतिविधियां की जा रही हैं।
इसके बाद कॉल को कथित टेलीकॉम अधिकारी और दिल्ली के बारह खंभा रोड पुलिस स्टेशन के फर्जी अधिकारी से जोड़ दिया गया। ठगों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी। फिर एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और जांच के नाम पर बैंक खाते व संपत्ति की जानकारी मांगी।
डर और दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 36 लाख 97 हजार 117 रुपये ट्रांसफर कर दिए। परिजनों को जानकारी होने पर ठगी का खुलासा हुआ। 17 फरवरी को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई गई, जहां तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 2 लाख रुपये होल्ड कराए गए।पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(6), 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत अपराध दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Shashi Mohan Singh ने कहा कि पुलिस, सीबीआई या कोई भी जांच एजेंसी कभी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। ऐसे कॉल पूरी तरह साइबर ठगी हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं।




