एक नवजात बच्ची….दो ब्लड ग्रुप! अटल आरोग्य लैब की रिपोर्ट पर उठे सवाल

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर जिला अस्पताल में एक नवजात बच्ची की ब्लड जांच रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अटल आरोग्य लैब से जारी दो अलग-अलग रिपोर्ट में एक ही बच्ची का ब्लड ग्रुप अलग-अलग दर्ज किया गया है। महज दो दिन के अंतराल में सामने आई रिपोर्ट ने जांच की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार 9 जून को जारी रिपोर्ट में नवजात बच्ची का ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ बताया गया था, जबकि 11 जून को जारी दूसरी रिपोर्ट में उसी बच्ची का ब्लड ग्रुप ‘ए पॉजिटिव’ दर्ज किया गया। एक ही मरीज की दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन और लैब की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि परिजनों के अनुसार जन्म के समय बच्ची का वजन करीब साढ़े तीन किलो था, जबकि दो दिनों मे वजन घटकर लगभग ढाई किलो रह गया है। बच्ची की तबीयत को लेकर परिजन चिंतित हैं। वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ब्लड ग्रुप को लेकर ही स्पष्टता नहीं है, तब उसका इलाज किस आधार पर किया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि अब तक उन्हें बच्ची के सही ब्लड ग्रुप की जानकारी नहीं मिल पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लड ग्रुप की गलत रिपोर्ट किसी भी मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है, लेकिन नवजात शिशुओं के मामले में इसका जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। यदि आपात स्थिति में गलत रिपोर्ट के आधार पर रक्त चढ़ा दिया जाए तो इसके गंभीर और जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।
सरकार की अटल आरोग्य लैब योजना का उद्देश्य लोगों को सटीक और विश्वसनीय जांच सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन बिलासपुर में सामने आए इस मामले ने इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग पर है कि इस गंभीर चूक की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है या नहीं। क्योंकि यहां सवाल सिर्फ एक रिपोर्ट का नहीं, बल्कि मरीजों की जान और स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों के भरोसे का है।



