छत्तीसगढ़

शहर में फ़ैला हैं “कोनोकार्पस” का गंभीर खतरा, अब इसके पौधरोपण पर रोक….

(दिलीप जगवानी ) : चमकने वाली सभी चीजे हीरा नही होती उसी तरह हमारे आसपास फैली हरियाली मे नुकसान पहुँचाने वाले पेड़ पौधे मौजूद है। इसकी पहचान कर छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अहम फैसला लेते हुए पूरे राज्य में कोनोकार्पस प्रजाति के नए पौधे लगाने पर रोक लगा दी है। यह विदेशी प्रजाति स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए नुकसानदायक है।

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आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब राज्य में कोई भी व्यक्ति, सरकारी विभाग, नगर निकाय या निजी संस्था कोनोकार्पस का नया पौधारोपण नहीं कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित केंद्रीय सशक्त समिति की रिपोर्ट में इस प्रजाति को आक्रामक बताते हुए इसके कारण स्थानीय वनस्पतियों, भूजल और प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

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इस पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाते हुए सरकार ने भविष्य में देशी प्रजातियों के पौधों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही है। जानकर बताते है की कोनोकार्पस का पौधा दिखने मे सुंदर होता है लेकिन इसका असर उससे कहीं ज्यादा घातक होता है जमीन मे गहरे तक फैली इसकी जड़े तेजी से पानी सोखती है।सिवरेज लाइन और केबल से लिपट कर उसे ख़राब कर सकती है, इस प्रजाति का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पर्यावरण पर पड़ता है। जमीन की उर्वरा शक्ति को कमजोर करता है और इसके फुल पत्ते वातावरण मे फ़ैलकर इंसानों को एलर्जीक बीमारी परोसते है।

अब तक जानकारी नही होने से शहर के तक़रीबन सभी इलाकों मे सुंदरता और पर्यावरण के लिए नगर निगम ने कोनोकार्पस के सैकड़ो पौधे लगाए है जिसको पुरी तरह खत्म होने मे कई साल लग सकते है।यह विदेशी प्रजाति हमारे वानिकी प्रजाति से उलट पर्यावरण और मानव जीवन के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है जिसका दुष्प्रभाव लम्बे वक़्त तक रह सकता है। भला हो उन पर्यावरण प्रेमियों का जिसने बेहद संवेदनशील मुद्दे को जानकर इसके खतरे से देश को आगाह किया।

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