‘सांप काटने’ का महाघोटाला:- एसएसपी की दो टूक,पूरे सिंडिकेट को ‘एंड-टू-एंड’ दिलवाएंगे कड़ी सजा

(आशीष मौर्य संपादक/मयंक सिंह) : बिलासपुर – बीमारी या सामान्य मौत को ‘सांप के काटने’ की कहानी बना देना… फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार करना… और फिर आपदा राहत के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपए उड़ा लेना, बिलासपुर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिला कर रख दिया है।आपदा के नाम पर मिलने वाली सरकारी राशि पर डाका डालने वाले एक बहुत बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है,जिस पर पुलिस अब एन्ड टू एन्ड कार्यवाही कर रही है.
पूरा मामला बिलासपुर जिले का है, जहां सांप काटने से हुई मौत पर मिलने वाले सरकारी मुआवजे को हड़पने के लिए एक संगठित रैकेट काम कर रहा था। इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद बिलासपुर पुलिस ने एक-दो नहीं, बल्कि अलग-अलग थानों में कुल 14 एफआईआर दर्ज की हैं।किसी व्यक्ति की सामान्य मौत होने पर यह गैंग सक्रिय हो जाता था और परिजनों को लालच देकर मौत की वजह ‘सांप का काटना’ लिखवाता था,इसके लिए फर्जी पंचनामा, फर्जी पोस्टमॉर्टम और जाली मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार किए जाते थे।छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सर्पदंश से मौत पर दी जाने वाली 4 लाख रुपए की सहायता राशि को यह सिंडिकेट आपस में बांट लेता था.इस महाघोटाले पर एसएसपी रजनेश सिंह ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने इस पूरे रैकेट को चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि इस खेल में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।
यह एक बेहद गंभीर और संगठित अपराध है। इस पूरे सिंडिकेट को ‘एंड-टू-एंड’ यानि शुरुआत से लेकर अंत तक बेनकाब किया जाएगा। चाहे वह फर्जीवाड़ा करने वाले आवेदक हों, दलाल हों, वकील हों या फिर फर्जी रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टर और पटवारी—कड़ी से कड़ी सजा दिलवाई जाएगी.
दरअसल, इस मामले की गूंज छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी सुनाई दी थी, जिसके बाद जब जांच हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। बिलासपुर पुलिस अब स्वास्थ्य विभाग और राजस्व विभाग के उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनकी मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा मुमकिन नहीं था। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां तय मानी जा रही हैं।




