मदकू द्वीप की प्राचीन धरोहरों पर बंदरों का बढ़ता खतरा, संरक्षण की मांग तेज

(धीरेंद्र मेहता) : मुंगेली जिले के प्रसिद्ध पुरातात्विक एवं धार्मिक पर्यटन स्थल मदकू द्वीप में स्थित प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक अवशेषों के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय नागरिकों और धरोहर प्रेमियों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि द्वीप में बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या से सदियों पुरानी संरचनाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है।
मदकू द्वीप छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। यहां पुरातत्व विभाग के उत्खनन में प्राचीन मंदिर, मूर्तियां और स्थापत्य अवशेष मिले हैं, जिन्हें देखने हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक, शोधार्थी और श्रद्धालु पहुंचते हैं। लेकिन इन दिनों बंदरों के झुंड मंदिरों, स्तंभों और नक्काशीदार पत्थरों पर लगातार उछल-कूद करते नजर आ रहे हैं, जिससे इन संरचनाओं के क्षरण और टूट-फूट की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय और प्राकृतिक प्रभावों से पहले ही कमजोर हो चुके इन पुरातात्विक अवशेषों को अब बंदरों की गतिविधियों से अतिरिक्त नुकसान पहुंच रहा है। वहीं पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि कई बार बंदरों के झुंड अचानक लोगों के करीब पहुंच जाते हैं। नागरिकों ने वन विभाग और पुरातत्व विभाग के संयुक्त प्रयास से बंदरों के वैज्ञानिक पुनर्वास, सुरक्षा घेरा निर्माण और नियमित निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मदकू द्वीप की अमूल्य धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।




