सचिन तेंदुलकर की पत्नी-बेटी का बिलासपुर आगमन, करीब से देखा ग्रामीण जीवन

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक बेहद खास और संवेदनशील खबर सामने आई है जहां क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले Sachin Tendulkar का परिवार इन दिनों चुपचाप सामाजिक सरोकारों को समझने के मिशन पर पहुंचा।यह दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया, ताकि बिना किसी भीड़-भाड़ और औपचारिकता के गांवों की असल तस्वीर को करीब से देखा जा सके।
मंगलवार तड़के Anjali Tendulkar, Sara Tendulkar और सानिया चंडोक बिलासपुर पहुंचे… जहां वे सीधे होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में ठहरे।
दोपहर होते ही तेंदुलकर परिवार शहर की चकाचौंध से दूर छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा, जहां उन्होंने ग्रामीणों, बच्चों और विशेष रूप से बैगा आदिवासी समुदाय से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने गांव की जीवनशैली, स्वास्थ्य सुविधाओं और पोषण से जुड़ी जमीनी चुनौतियों को बेहद करीब से समझने की कोशिश की।दौरे का दूसरा अहम पड़ाव रहा गनियारी जहां परिवार ने जन स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया और वहां चल रही योजनाओं को विस्तार से समझा।जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था के को-फाउंडर डॉ. रमन कटारिया के मुताबिक तेंदुलकर परिवार करीब डेढ़ दिन तक यहां रहा और संस्था के ‘फुलवारी’ कार्यक्रम का निरीक्षण किया।
यह कार्यक्रम 3 साल से कम उम्र के बच्चों के पोषण और देखभाल पर केंद्रित है जो ग्रामीण इलाकों में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। डॉ. कटारिया ने बताया कि पिछले एक साल से Sachin Tendulkar Foundation इस कार्यक्रम को सहयोग दे रहा है… और इस दौरे के दौरान परिवार ने इसे आगे भी जारी रखने का भरोसा दिया है।सूत्रों के मुताबिक यह दौरा सिर्फ एक विजिट नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
हालांकि इस पूरे दौरे को बेहद सीमित और गोपनीय रखा गया, लेकिन अब इसकी तस्वीर सामने आने के बाद यह साफ है कि तेंदुलकर परिवार सिर्फ खेल ही नहीं, बल्कि समाज के सबसे जरूरी मुद्दों पर भी गंभीरता से काम कर रहा है।बताया जा रहा है कि तेंदुलकर परिवार आज शाम मुंबई लौट सकता है, लेकिन बिलासपुर के गांवों में उनकी यह खामोश मौजूदगी एक बड़ा संदेश छोड़ गई है कि बदलाव की शुरुआत जमीनी हकीकत को समझने से ही होती है।




