बिलासपुर

शरीर, मन व चेतना की समझ ही मोक्ष का मार्ग – परम आलय

(दिलीप जगवानी) : प्रकृति के वैश्विक नियमों का अक्षरशः पालन कर लोग अपनी बीमारियों, आपसी झगड़े, तनाव मुक्त होकर शांतिपूर्ण जीवन यापन करते हुए खुद को आसानी से समझकर परम मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। इंदौर के पास 17 एकड़ के सुरम्य प्राकृतिक वातावरण में आधुनिक सुखसुविध युक्त वातावरण में सुबह की सतत साधना के पश्चात प्राकृतिक फलों, बीजों व मेवा का अदृश्य नाश्ता तथा ज्ञानार्जन सत्र के अपनी जिज्ञासाओं के समाधान के बाद ग्रेविटेशन घटाने व लेविटेशन बढ़ाने वाले शुद्ध सात्विक रसपूर्ण भोजन प्रसाद ग्रहण कर योगनिद्रा से तरोताजा होकर जीवित गुरु के सानिध्य में देश विदेश के विद्वानों की चर्चित पुस्तकों का पठन, दैनिक प्रयोग कर रात ठीक 9 बजे शुन्य के नाद श्रवण करते करते निद्रा देवी के आगोश में जाकर अपने तन मन धन को संतुलित करते हुए मोक्ष मार्ग को आसानी से प्राप्त करने के साक्षात प्रयोग सन टू ह्यूमन फाउण्डेशन के संस्थापक परम पूज्य परम आलय जी द्वारा करवाए जा रहे हैं।

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बिलासपुर से ललित अग्रवाल, निशा अग्रवाल, नरेश अग्रवाल व रायपुर से योगेश अग्रवाल, मुकेश जैन, कैलाश बजाज सहित बिलासपुर, रायपुर से सैकड़ों व देश विदेश से हजारों जिज्ञासु साधकों ने गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर उपरोक्त प्रयोगों से ना केवल स्वास्थ्य लाभ लिया अपितु स्वयं के अंदर विराजमान परमात्मा से भी आत्मसात किया। माँ मैयेत्री, माँ गार्गी, शुन्य भैया, जनक आनंद जी, श्रीपति मेहता जी, शिवालय, माँ सहजोबाई, मां जानकी, मां प्रार्थना, मां सरस्वती, माँ परमभक्ति, मां राधिका, मां तारिणी, आभ्या, श्रीकृष्ण, केशव, शांतिलाल, नित्यानंद, कल्कि, श्रवण, ध्यान, रविकिरण, विवेकानंद, सचिन, मोहन सेठा , प्रवीण सहित देश के कोने कोने से सैकड़ों परम मित्रों द्वारा 11 दिनों से सुबह 3.30 बजे से रात 9 तक तन मन धन से स्वस्थ्य रहने हेतु सम्यक आहार, सम्यक व्यायाम व सम्यक नींद से जीवन मे आमूल चूल सुधार हेतु दिनचर्या में मात्र आंशिक संशोधन करवाया गया। 18 से 28 जनवरी तक चले उक्त नवरात्रि शिविर में लंदन, अमेरिका, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, पुणे, संभाजीनगर सहित देश विदेश के कोने कोने से लोगो ने सात्विक, पौष्टिक आहार ग्रहण कर नई अनुभूति, अनुपम, अविस्मरणीय, चमत्कारिक प्रयोग अनुभव करते हुए नवमी के दिन हर्षित हृदय से विविध नाट्य का मंचन भी किया। ललित अग्रवाल ने बताया कि परम आलय के उक्त रहस्यमय मंदिर में बिताए गए 18 दिन स्वर्ग से सुंदर, यादगार हैं। इसे छोड़कर जाने का मन ही नहीं हो रहा है। सभी साधकों की आँखें नम है। अभीतक उक्त गैर व्यवसायिक संस्था द्वारा पूरे भारतवर्ष एवं विदेशों में 400 से भी अधिक नये दृष्टिकोण वाले शिविर आयोजित हो चुके हैं. आगामी 25 फरवरी से अहमदाबाद व 6 मार्च से आनंद शिविर के बाद 18 मार्च से नववर्ष की नवरात्रि पर आयोजित शिविर में जाने हेतु पुनः बिलासपुर से सैकड़ों साधकों ने अग्रिम पंजीयन करवा लिया है।

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शरीर, मन और चेतना को विकसित करने प्रयोग से अभी तक लाखों लोगों ने अपनी शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों जैसे डायबिटीज हाई, बीपी, थायराइड, माइग्रेन, अस्थमा, आर्थराइटस, तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी आदि को ठीक किया है,और अपने जीवन में प्रेम और आनंद को विकसित किया है.

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