छत्तीसगढ़

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल ने मनाया 64वां स्थापना दिवस, 38वीं वाहिनी में दिखा देशभक्ति का जोश

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल ने आज पूरे देश में अपना 64वां स्थापना दिवस उत्साह और गर्व के साथ मनाया। इसी क्रम में बिलासपुर स्थित 38वीं वाहिनी में सेनानी रोशन सिंह असवाल के कुशल नेतृत्व में विशेष समारोह का आयोजन किया गया।

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समारोह के दौरान उप सेनानी अजय शर्मा ने सभी अधिकारियों, जवानों और उनके परिजनों को स्थापना दिवस की बधाई दी। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि आईटीबीपी की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को देश की सीमाओं की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में “वन बॉर्डर वन फोर्स” की नीति के तहत भारत-चीन सीमा की 3488 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी को सौंपी गई। आज यह बल 9000 से 18000 फीट की ऊंचाई पर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहा है।

उप सेनानी अजय शर्मा ने कहा कि : “आईटीबीपी के जवान सीमाओं की निगरानी के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और छत्तीसगढ़ में माओवाद से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हमारा आदर्श वाक्य ‘शौर्य, दृढ़ता, कर्म निष्ठा’ हर हिमवीर की पहचान है।”

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि 38वीं वाहिनी को वर्षों से उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई सम्मान मिले हैं। वर्ष 2016 में बेस्ट नॉन बॉर्डर बटालियन रनिंग ट्रॉफी, वर्ष 2018 और 2022-23 में सर्वश्रेष्ठ एंटी-नक्सल ऑपरेशन बटालियन और 2018-19 में सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ बटालियन का खिताब प्राप्त हुआ है।

समारोह के अंत में सेनानी रोशन सिंह असवाल और उप सेनानी अजय शर्मा ने सभी अधिकारियों और जवानों से हाथ मिलाकर शुभकामनाएं दीं।
आईटीबीपी के हिमवीरों की जज़्बे और देशभक्ति से ओतप्रोत इस समारोह ने एक बार फिर साबित किया कि सीमा की सुरक्षा और देश की सेवा में यह बल सदैव तत्पर है।

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