ग्रीन कॉरिडोर बना दो मासूम जिंदगियों की उम्मीद, एयर एंबुलेंस से हैदराबाद रवाना….

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर से एक संवेदनशील और सराहनीय खबर सामने आई है. त्वरित इलाज उपलब्ध कराने प्रशासन की तत्परता ने दो नन्हीं ज़िंदगियों को नई उम्मीद दी है।
बिलासपुर शहर में इंसानियत और सिस्टम की चुस्ती ने मिलकर एक मिसाल पेश की। मामला प्रीमैच्योर जुड़वा बच्चों का है… जो जन्म के बाद ही क्रिटिकल स्टेज में थे। दोनों बच्चों का वजन और प्लेटलेट्स बेहद कम थे। इन बच्चों के आईएफएस परिजन, वन विभाग में उच्च पदो पर पदस्थ हैं, उन्होंने अपने नाजुक हालत में पैदा हुए नवजातों के बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद ले जाने का निर्णय लिया।
लेकिन बच्चों की हालत नाजुक देख उन्हें और सुरक्षित एयर एंबुलेंस तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। एयर एंबुलेंस चकरभाटा एयरपोर्ट पर मौजूद थी और बच्चों को शहर के मध्यनगरी के पास निजी अस्पताल से वहां तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने तत्परता दिखाई। करीब दोपहर 12:30 बजे, एंबुलेंस को अस्पताल से निकाला गया और ट्रैफिक पुलिस की मदद से तैयार ग्रीन कॉरिडोर पर नन्हीं जानों को लेकर वाहन तेजी से दौड़ गया। हर चौराहे, और प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक जवान मुस्तैदी से तैनात रहे… ताकि बिना किसी देरी के एंबुलेंस सीधे एयरपोर्ट तक पहुंचे। एसएसपी के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक की निगरानी में यह ग्रीन कॉरिडोर सफलतापूर्वक संचालित किया गया… और दोनों बच्चों को जल्दी और सुरक्षित एयर एंबुलेंस तक पहुंचाया ।
इससे पहले भी बिलासपुर में ग्रीन कॉरिडोर के ज़रिए कई ज़िंदगियों को समय पर इलाज मिला है… लेकिन इस बार मामला दो जुड़वां मासूमों का था… और पूरी टीम ने ये साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है। सिस्टम जब संवेदनशीलता के साथ काम करे… तो नतीजे ऐसे ही उम्मीद भरे होते हैं। हम दुआ करते हैं कि दोनों बच्चे जल्द स्वस्थ होकर घर लौटें।




