Uncategorized

होली मनाने बाजार में लौटी रौनक, रंग-गुलाल पिचकारी मुखौटे से सजी दुकानें – चंद दिनों बाद मनाईं जायेगी रंगोत्सव होली

(मुन्ना पांडेय) सरगुजा – सदियों पुरानी चली आ रही प्रथा को कायम रखते हुए चंद दो दिनों बाद रंगों का त्योहार होली नगर पंचायत लखनपुर सहित आसपास ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से मनाई जाएगी।सारा आलम होलियाना खुमार में डुबा हुआ है बाजार में रौनक देखी जा रही है।रंग-बिरंगे गुलाल रंग पिचकारी मुखौटे मिठाईयों आदि से सज गये हैं। खरीदारी की जा रही है दरअसल भद्रा और लगने वाली चन्द्र ग्रहण ने लोगों के दिलों दिमाग में भ्रम के हालात पैदा कर दिये है। हिन्दू त्योहारो में होली का विशेष महत्व रहा है। होलिका दहन की तिथि को लेकर पहले से ही पेशोपेश की स्थिति बनी हुई है। कुछ जानकार पंडित 2 मार्च को तथा 3 मार्च को होलिका दहन किये जाने अपने विचार व्यक्त किये है अब के बरस के होली त्योहार चर्चा का विषय बना हुआ हैं। दरहकीकत होलिका दहन पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इसलिए तिथि की शुरुआत महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन इस दिन भद्रा की साया होने के वजह से आम जनमानस में संशय की स्थिति बनी हुई है। भ्रम की खास वजह 3 मार्च को लगने वाली चन्द्र ग्रहण है। बहरहाल रंगों का त्योहार होली आने वाले चंद दो रोज बाद किसी भी सूरत में उल्लास के साथ मनाई जाएगी।

Advertisement

*उठ गई फाग गीतो की मेहफिल*
पुराने समय में सरसों फूलने के साथ ही महिनों गांव के चौपालो में फाग गीतो की मेहफिल जमा करती थी होली के रसिक लोक संस्कृति से सराबोर प्रचलित फाग गीत गाते थे। लेकिन अब ओ लोग रहे न वैसा फागुन गीत गाये जाते हैं। गांव के गलियारों में अब फाग गीतो की सिमटी हुई यादें बाकी है। आधुनिकता ने अपना बसेरा बना लिया है। डीजे साउण्ड सिस्टम पर थिरकते नव युवक युवतियां फागुन गीत की लुत्फ उठा रहे हैं। हकीकत में ढोल मंजीरे नगाड़े तासे के संग गाये जाने वाले फाग गीतो से कोसों दूर है बदलते वक्त के साथ लोग पुराने चलन भूलते चले जा रहे हैं। जिन चौक चौराहों पर फागुन गीत महिनों गाये जाते थे ।वहां विरानी ही विरानी सुनापन है। बस फागुन मनाये जाने की बेरंग चलन जिदा है।कुछ भी हो क्षेत्र में रंगों का त्योहार होली मनाई जाएगी।

Advertisement

Related Articles

Back to top button