जिला अस्पताल का गायनिक वार्ड बना “कपड़ा मार्केट”! जच्चा-बच्चा वार्ड में संक्रमण को बुलावा, CCTV जांच की मांग

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर जिला अस्पताल का प्रसूति वार्ड इन दिनों इलाज नहीं, बल्कि कथित “कपड़ा बाजार” को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि बाहरी महिलाएं बड़े-बड़े बैग में कपड़े भरकर सीधे गायनिक वार्ड तक पहुंचीं और वार्ड के भीतर ही नर्सिंग स्टाफ, मरीजों और उनके परिजनों को कपड़े दिखाकर खरीदारी कराई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जच्चा-बच्चा वार्ड में संक्रमण रोकने के लिए सख्त नियम लागू रहते हैं, वहीं खुलेआम बाजार जैसा माहौल बन गया।
सूत्रों के मुताबिक वार्ड के भीतर घंटों तक कपड़ों की खरीदी-बिक्री चलती रही और अस्पताल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी, या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि बाहरी लोगों की लगातार आवाजाही से वार्ड की सुरक्षा और साफ-सफाई दोनों पर खतरा बढ़ गया। इतना ही नहीं, चर्चा यह भी है कि ओटी रूम के आसपास तक कपड़ों की बिक्री की गई, जिसने पूरे अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार को मामले की जानकारी लगते ही जब मीडिया टीम अस्पताल पहुंची तो वार्ड में हड़कंप मच गया। कैमरा देखते ही कुछ कर्मचारी और नर्सिंग स्टाफ इधर-उधर होते नजर आए। सवाल पूछे जाने पर कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी खुलकर जवाब नहीं दे सका। वहीं सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर ने पूरे मामले से अनभिज्ञता जताई, जबकि अस्पताल के भीतर इस घटना की चर्चा आम बताई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रसूति वार्ड तक बाहरी महिलाएं पहुंचीं कैसे? सुरक्षा गार्ड क्या कर रहे थे? क्या अस्पताल के भीतर बिना मिलीभगत के इस तरह का ” मार्केट” लग सकता है? आरोप यह भी लग रहे हैं कि प्रसूति विभाग के कुछ कर्मचारियों को जरूरत से ज्यादा छूट मिली हुई है, जिसकी आड़ में अस्पताल के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
फिलहाल पूरे मामले का सच अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी सिस्टम और प्रशासनिक नियंत्रण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।




