अचानकमार टाइगर रिजर्व में गूंजी बाघों की दहाड़: संरक्षण प्रयासों से बाघों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर/मुंगेली – अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की दहाड़ गूंजने लगी है, अब बाघों की बढ़ती संख्या ने न सिर्फ वन विभाग की मेहनत को सार्थक किया है,बल्कि जंगल मे बाघो की संरक्षण की दिशा में एक बड़ी सफलता भी दिलाई है।
मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व को केंद्र सरकार से 70 फीसदी अंक मिले हैं। यह स्कोर वर्ष 2018 में मिले 63 फीसदी अंक से 7 प्रतिशत अधिक है। यह न केवल संरक्षण कार्यों की सफलता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि एटीआर अब बाघों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल निवास बन चुका है। दिल्ली की ग्लोबल टाइगर फोरम की तीन सदस्यीय टीम ने पिछले साल अचानकमार का गहन सर्वे किया था।
इस टीम में पूर्व आईएफएस अफसर डॉ. राजेश गोपाल, एचएस नेगी और मोहनीश कपूर शामिल थे। उन्होंने लमनी, छपरवा और अचानकमार रेंज के उन सभी इलाकों का दौरा किया, जहां बाघों की आमद रहती है। सर्वे के दौरान ट्रैप कैमरों में 6 बाघों की मौजूदगी दर्ज हुई। इसके आधार पर एटीआर को 100 में से 70 अंक दिए गए। अब वन विभाग के अनुसार रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 14 से अधिक हो चुकी है। डिप्टी डायरेक्टर, एटीआर गणेश क्यू आर ने बताया हर साल मानसून में कोर जोन को सैलानियों के लिए बंद कर दिया जाता हैं. ताकि वन्यजीवों के प्रजनन में कोई बाधा न आए। यही कारण है कि बीते पांच सालों में टाइगर की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
टाइगर के साथ-साथ चीतल, सांभर, जंगली कुत्ते, हाथी, मगरमच्छ, और अन्य वन्यप्राणियों की संख्या में भी इजाफा दर्ज किया गया है। अचानकमार का जंगल अब न सिर्फ टाइगर के लिए बल्कि अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी एक आदर्श निवास बन चुका है। बाघों की बढ़ती संख्या एक तरफ जहां संरक्षण की सफलता है, वहीं यह जिम्मेदारी भी बढ़ाती है कि इन वन्य प्राणियों और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जाए। अचानकमार की यह सफलता देशभर के टाइगर रिजर्व के लिए एक प्रेरणा है।




