आधार से होगी पीएफ खाते की पहचान

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने सदस्यों के लिए एक आधार पर एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जारी करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है। इसका मकसद पीएफ से फंड निकासी की प्रक्रिया आसान बनाना है। इससे किसी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने या दूसरी नौकरी पाने पर दो यूएएन नंबर नहीं होंगे।
ईपीएफओ द्वारा यूएएन को बड़े महत्वाकांक्षी उद्देश्य से लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत कर्मचारी को एक यूएएन जारी किया जाता है। अगर कोई सदस्य एक नौकरी छोड़कर दूसरी ज्वाइन करता है तो उसे नई जगह पर सिर्फ अपना यूएएन नंबर देना होता है। उसके बाद पुराने पीएफ खाते की धनराशि नए खाते में ट्रांसफर हो जाती है।
लेकिन देखने में आया है कि एक सदस्य के नाम पर दो या उससे अधिक यूएएन नंबर जारी हैं। ऐसे में कर्मचारी जब पीएफ निकासी के लिए आवेदन करता है तो सिस्टम को यह पता नहीं होता है कि वह किस खाते से धनराशि निकासी के लिए दावा कर रहा है। ऐसे में कई बार दावा खारिज हो जाता है या निकासी में काफी समय लगता है।
अगर पहले से यूएएन है तो नया नंबर जारी नहीं होगा। इसी यूएएन पर पीएफ खाता भी सक्रिय होगा। अगर कर्मचारी के आधार पर कोई भी यूएएन जारी नहीं हुआ है तो फिर नया नंबर जारी किया जाएगा। ईपीएफओ 3.0 यानी नए सिस्टम में यह प्रक्रिया पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगी।
हालांकि, बीते वर्ष नंबर से आधार आधारित वन टाइम पासवर्ड की व्यवस्था को लागू किया था लेकिन अब उसे अधिक एडवांस बनाने पर काम चल रहा है, जिसमें एक आधार पर एक ही यूएएन खोला जा सकेगा। इसके बाद पीएफ खाते से धनराशि निकासी में लोगों को परेशानी नहीं होगी।
कई मामलों में देखा गया है कि कोई कर्मचारी पुरानी से नई कंपनी में जाता है तो पुराना यूएएन नंबर नहीं देता है या नई कंपनी नहीं मांगती है। ऐसे कर्मचारियों को ईपीएफओ पोर्टल पर नए सदस्य के तौर पर पंजीकृत कर दिया जाता है, जिससे ईपीएफओ का आईटी सिस्टम नया यूएएन जारी कर देता है।
इससे कर्मचारी को दो या इससे अधिक यूएएन आवंटित हो जाते हैं। अधिकांश कर्मचारी इसे सामान्य प्रक्रिया मानते हैं। लेकिन समस्या तब खड़ी होती हैं, जब वे पीएफ खाते से निकासी करते हैं या खाते में जरूरी अपडे़ट करते हैं।
उनके ये जरूरी काम अटक जाते हैं, क्योंकि दो यूएएन नंबर होने से विवरण का मिलान और सत्यापन नहीं हो पाता है।




