
( आशीष मौर्य संपादक ) बिलासपुर लंबे समय से प्रतिनियुक्ति के बाद बीते 6 साल से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मे जमे में विवादित कर्मचारी मयूर गेमनानी की अंततः टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से छुट्टी हो ही गयी.विवादित कर्मचारी को उसके मूल विभाग ग्रामीण यंत्रिकी सेवा विभाग मे भेज दिया गया है.दरअसल पूरा मामला टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का है ।
जहां पर मयूर गेमनानी ने जमकर मनमानी की और टी एंड सी प्लांनिग से नक्शा स्वीकृति से लेकर बिल्डरों और कॉलोनाइजर्स को खूब फायदा पहुंचाया. तत्कालीन कलेक्टर के पास लगातार मिल रही शिकायत के बाद अवनीश कुमार शरण ने दिनांक 30/12/2024 को आदेश जारी कर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय में जमे मयूर गेमनानी को उसके मूल विभाग ग्रामीण यांत्रिकी सेवा में भेज दिया।

नगर तथा ग्राम निवेश यानि टी एंड सी मे रहते हुए मयूर गेमनानी ने खूब मलाई खाया. जिसके कारण वह अपने मूल विभाग को भूल गया.शासन और कलेक्टर के आदेश के बाद,मयूर गेमनानी ने उस आदेश को हाईकोर्ट मे याचिका दायर कर चुनौती दी,ताकि वह इस मलाईदार विभाग मे जमा रहे,लेकिन हाईकोर्ट ने उसकी याचिका को निरस्त कर दिया. उसके बाद 29 अप्रैल को नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक ने आदेश जारी करते हुए मयूर गेमनानी को उसके मूल विभाग ग्रामीण यंत्रिकी सेवा मे भेज दिया है.

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग मे,अंगद के पांव की तरह जमा रहा :-
ज्ञात हो कि मयूर गेमनानी को संचालनालय शर्तों के अनुसार नगर और ग्राम निवेश में खाली पद की भर्ती अथवा प्रतिनियुक्ति के दो साल पूरे होने पर मयूर गेमनानी को मूल विभाग लौटना था,मयूर ने 12 जुलाई 2018 को ज्वान किया,इस दौरान कलेक्टर तक उनकी लगातार गंभीर शिकायत मिल रही थी,मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जांच पड़ताल का आदेश दिया. तब जाकर मयूर गेमनानी की टी एंड सी से छुट्टी हुई.
नियमितीकरण मे किया जमकर खेल, जाँच बाकी:-
सूत्र बतातें हैं कि राजनैतिक संरक्षण प्राप्त कर पिछले 6 सालों से जबरन टाउन & कंट्री प्लान विभाग मे बैठ कर मयूर गेमनानी ने एजेंट बन कर काम नियमो को ताक मे रखकर शासन को करोडो रु की आर्थिक हानि पहुचाई ,मयूर के खिलाफ गंभीर शिकायते भी शासन स्तर तक की गई थी लेकिन राजनैतिक दबाब के चलते कार्यवाही नही हो रही थी।
मयूर गेमनानी का उसके मूल विभाग ग्रामीण यंत्रिकी सेवा मे वापसी तो हो गयी, लेकिन उअके खिलाफ लगे गंभीर आरोपो की जांच कब तक होती है और इनके पद मे रहते हुए नियमो के विपरीत किये गए नियमतीकरण के मामलों का खुलासा कब तक होता है ये देखने वाली बात होंगी.




