बिलासपुर

क्राइम सीन पर नहीं बचेगी चूक, पुलिस अधिकारियों को मिले फॉरेंसिक जांच के विशेष टिप्स

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर – पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में बिलासागुड़ी पुलिस लाईन में एक दिवसीय महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विवेचना की बारीकियों को समझना और फॉरेंसिक विज्ञान के माध्यम से केस को कोर्ट में मजबूत बनाना था।

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​75 अधिकारियों ने सीखे विवेचना के गुर​ : इस कार्यशाला में जिले के राजपत्रित अधिकारियों सहित थाना/चौकी प्रभारी और विवेचकों को मिलाकर कुल 75 पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का मुख्य विषय “अपराध स्थल का एफएसएल (FSL) निरीक्षण, साक्ष्य का महत्व और जप्ती की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी” रहा।

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​फॉरेंसिक विशेषज्ञों का मार्गदर्शन​ :वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. समीर कुर्रे और वैज्ञानिक अधिकारी प्रशांत कुमार ने प्रशिक्षण प्रदान करते हुए बताया कि कैसे अपराध स्थल (Scene of Crime) का सही निरीक्षण केस की दिशा बदल सकता है। उन्होंने कृत्रिम अपराध स्थल बनाकर अधिकारियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी, जिसमें शामिल था:​साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा करना।​सबूतों की विधिवत पैकिंग और सीलबंदी।​फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए साक्ष्यों का संरक्षण।

 

​चश्मदीद गवाह मुकरने पर भी होगी सजा : कार्यशाला में उप निरीक्षक कृष्णा साहू ने अपना व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार सटीक नजरी नक्शा, जप्ती और अन्य दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने उन केसों में भी आजीवन कारावास की सजा दिलवाई, जहाँ चश्मदीद गवाह मुकर गए थे। उन्होंने परिस्थितियों के आधार पर साक्ष्य जुटाने की महत्ता पर जोर दिया।

 

​शीघ्र नष्ट होने वाले साक्ष्यों पर फोकस : वैज्ञानिक अधिकारियों ने ‘सीन ऑफ क्राइम’ स्केच तैयार करने, शीघ्र नष्ट होने वाले साक्ष्यों के एकत्रीकरण और उन्हें समय रहते एफ.एस.एल. लैब भेजने की प्रक्रियाओं की जानकारी दी। इस दौरान विवेचना में होने वाली सामान्य त्रुटियों और कमियों को दूर करने के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

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