बिलासपुर

बीजापुर में नेत्र ऑपरेशन की जटिलता पर जांच, क्या बिलासपुर में भी है निगरानी?

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – बीजापुर जिला अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन के बाद कई मरीजों में आई जटिलता ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, लेकिन अब इसी तरह की आशंका बिलासपुर जिले को लेकर भी उठ रही है।

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बीजापुर की घटना के बाद यह सवाल सामने आ रहा है कि क्या बिलासपुर जिले में भी ऐसे कोई मरीज हैं जिन्हें ऑपरेशन के बाद जटिलता का सामना करना पड़ा हो? अगर हैं तो उनकी देखरेख के लिए क्या कोई विशेष टीम तैनात की गई है, या फिर सिर्फ ऑपरेशन कर मरीजों को घर भेज देने की व्यवस्था ही चल रही है?

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स्वास्थ्य विभाग ने बीजापुर मामले में डॉ. निधि अत्रिवाल, डॉ. महेश साण्डिया और डॉ. सरिता थॉमस की तीन सदस्यीय समिति बनाकर जांच शुरू कर दी है। समिति तीन दिनों में रिपोर्ट देगी। वहीं ऑपरेशन के बाद गंभीर स्थिति वाले नौ मरीजों को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कर इलाज जारी है, फिर हालात इसलिए भी चिंता बढ़ाते हैं क्योंकि पिछले सप्ताह बिलासपुर जिला अस्पताल में लगातार चार दिन तक नेत्र ऑपरेशन नहीं हुए। ग्रामीण अपने धान कटाई के व्यस्त समय में भी घंटों अस्पताल में डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। इसके बावजूद जिले की नोडल अधिकारी ने हॉस्पिटल में मौजूद पाँच डॉक्टरों में से किसी एक को भी तत्काल व्यवस्था संभालने का आदेश नहीं दिया। इसे भी गंभीर लापरवाही माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हर जिले में नेत्र ऑपरेशन के बाद निगरानी टीम होनी चाहिए, ताकि किसी भी जटिलता की पहचान समय पर की जा सके। सवाल ये भी है कि बिलासपुर में क्या ऐसी कोई मॉनिटरिंग टीम सक्रिय है या नहीं?

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर भी उंगलियां उठ रही हैं – क्या ऑपरेशन से पहले संक्रमण नियंत्रण से लेकर पोस्ट-ऑप निगरानी तक सभी मानकों का पालन हो रहा है? बीजापुर की घटना के बाद लोगों को भरोसा दिलाने के लिए विभाग को पारदर्शी रिपोर्ट और ठोस कदम दिखाने होंगे।

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