डिजिटल इंडिया की जमीनी हकीकत: बिलासपुर के हजारों छात्र जाति-आय प्रमाण पत्र के लिए भटकने को मजबूर

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर – जिले में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है। जिले के हजारों छात्रों का भविष्य जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों के अभाव में अधर में लटक गया है। शिक्षा विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और पोर्टल की धीमी रफ्तार ने शासन के महत्वपूर्ण अभियान पर पानी फेर दिया है।
जिले के चार प्रमुख विकासखंडों बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर कोटा से आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कुल 58,812 आवेदनों के मुकाबले पोर्टल पर महज 1,180 आवेदन ही दर्ज हो पाए हैं।इस भारी अंतर पर विभाग का कहना है कि तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ अभिभावकों द्वारा पुराने भूमि रिकॉर्ड और वंशावली जैसे दस्तावेज उपलब्ध न करा पाना मुख्य बाधा है।सबसे खराब स्थिति तखतपुर की है, जहां 11 हजार से ज्यादा आवेदनों में से केवल 55 ऑनलाइन हो सके हैं। बिल्हा में 20 हजार से ज्यादा आवेदनों में सिर्फ 138, मस्तूरी में करीब 20 हजार में से 643 और कोटा में 7 हजार से ज्यादा में केवल 344 आवेदन ही पोर्टल तक पहुंच पाए हैं।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रक्रिया इतनी जटिल थी, तो समय रहते इसके समाधान के लिए शिविर या वैकल्पिक मार्ग क्यों नहीं तलाशे गए.
नियमों के मुताबिक, बिना इन प्रमाण पत्रों के छात्रों को न तो छात्रवृत्ति मिल पाएगी और न ही आगामी उच्च शिक्षा के सत्रों में प्रवेश की राह आसान होगी। विभाग की इस ‘कछुआ चाल’ ने गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों की चिंता बढ़ा दी है।




