बिलासपुर

एक्शन मोड में सरकार: जेम पोर्टल के जरिए वित्तीय अनियमितता पर गिरी गाज, कुलसचिव सस्पेंड…..

(आशीष मौर्य संपादक) : छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के तत्कालीन कुलसचिव शैलेंद्र दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर विश्वविद्यालय मद की राशि में गड़बड़ी और जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से सामग्री क्रय करने में गंभीर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप हैं।

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​निलंबन का मुख्य आधार : जारी आदेश के अनुसार, शैलेंद्र दुबे ने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 (यथा संशोधित 2025) के नियमों का उल्लंघन किया है। प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि उन्होंने जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी में पद का दुरुपयोग किया, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत है। राज्य शासन ने उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत निलंबित किया है।

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​जेम पोर्टल खरीदी में ‘खेल’ का खुलासा : विश्वविद्यालय पर आरोप है कि 15 अप्रैल 2025 को बिना किसी खुली निविदा के, जेम पोर्टल के माध्यम से L1 पद्धति का सहारा लेकर करोड़ों रुपये की खरीदी की गई।

 

​एक ही दिन में 26 क्रय आदेश:जांजगीर की तीन प्रमुख फर्मों (सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप और ओशन एंटरप्राइज) को एक ही दिन में 26 ऑर्डर जारी किए गए।आरोप है कि ये सभी फर्में एक ही परिवार या समूह से जुड़ी हैं, जिन्हें लाभ पहुँचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया।

 

​कुलपति के निज सहायक की नियुक्ति पर भी विवाद : वित्तीय गड़बड़ी के अलावा, छात्रों ने कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी और शैलेंद्र दुबे पर प्रशासनिक अनियमितता के भी आरोप लगाए थे। इसमें कुलपति के निज सहायक उपेंद्र चंद्राकर की नियुक्ति प्रमुख है। आरोप है कि चंद्राकर का प्रमाण पत्र तकनीकी शिक्षा परिषद से अनुमोदित नहीं है और इसे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भी अमान्य घोषित कर चुका है।

 

​निलंबन अवधि की शर्तें​ : निलंबन के दौरान शैलेंद्र दुबे का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग बिलासपुर निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा, जबकि उनके खिलाफ विभागीय जांच अलग से संचालित की जाएगी।

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