कानन पेंडारी में पहली बार हिमालयन गोरल ने दिया शावक को जन्म, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

(भूपेंद्र सिंह राठौर ) : बिलासपुर के कानन पेंडारी मिनी जू में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यहां पहली बार दुर्लभ हिमालयन गोरल ने एक मादा शावक को जन्म दिया है। शावक और उसकी मां दोनों स्वस्थ हैं। इस सफल प्रजनन के बाद जू में हिमालयन गोरल की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
कानन पेंडारी जू में जन्मी मादा शावक को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जू प्रबंधन के अनुसार शावक पूरी तरह स्वस्थ है और लगातार उसकी निगरानी की जा रही है। वह अपनी मां के साथ बाड़े में सामान्य रूप से विचरण कर रही है। इस खबर से जू प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह का माहौल है।
हिमालयन गोरल एक दुर्लभ वन्यजीव है, जो मुख्य रूप से ऊंचे चट्टानी पहाड़ों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यह अपनी फुर्ती, तेज रफ्तार और कठिन चढ़ाई करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप शरीर का रंग होने के कारण यह आसानी से छिप जाता है और जंगल में इसका दिखाई देना काफी मुश्किल होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार मादा हिमालयन गोरल का गर्भकाल लगभग 170 से 218 दिनों का होता है और सामान्यतः एक से दो शावकों को जन्म देती है। कानन पेंडारी में पहली बार हुए इस सफल प्रजनन ने दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। जू प्रबंधन को विश्वास है कि आने वाले समय में इस प्रजाति की संख्या में और वृद्धि होगी तथा संरक्षण प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।




