15 सालों से नालियों से है पाइप लाइन की यारी, हटाने प्रस्ताव तैयार, खतरा बरकरार.

(भूपेन्द्र सिंह राठौर) : बिलासपुर में पेयजल व्यवस्था की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।शहर के कई वार्डों में पाइप लाइनें नाली-नालों के बीच से गुजर रही हैं, जिससे स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।शहर में कराए गए एक सर्वे में सामने आया था कि बिलासपुर के 59 वार्डों में पेयजल पाइप लाइनें सीधे नालियों में डूबी हुई हैं। इससे मलमूत्र युक्त गंदा पानी पाइप लाइन में रिसने की आशंका बनी हुई है, जिसके चलते डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट की अन्य गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।
तालापारा, तारबाहर, सरकंडा और तिफरा जैसे इलाकों में पहले भी दूषित पानी की आपूर्ति के कारण लोगों के बीमार पड़ने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2007 से 2017 के बीच जल आवर्धन योजना के तहत करीब 81 करोड़ रुपये और अमृत मिशन के अंतर्गत लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च कर शहर में 276 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई थी। इसके बावजूद आज भी शहरवासी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई इलाकों में अलग-अलग योजनाओं की दो से तीन पाइप लाइनें एक ही जगह बिछी होने से समस्या और बढ़ गई है। महापौर पूजा विधानी ने कहा नालियों से होकर गुजर रही पुरानी पाइप लाइनों को बदलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही पुराने और नए दोनों वार्डों में काम शुरू किया जाएगा, ताकि नागरिकों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।
वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर नगर निगम सरकार को घेरते हुए साफ पानी उपलब्ध नहीं करा पाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता प्रमोद नायक ने कहा करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद आज भी लोगों को गंदा पानी पीना पड़ रहा है। यह नगर निगम की बड़ी विफलता है।अब देखना होगा कि नगर निगम के वादे कब ज़मीनी हकीकत बनते हैं और शहरवासियों को शुद्ध पेयजल नसीब होता है।




