रायपुर

किराया पूरा, काम अधूरा….मैं हूं भारतीय रेल

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर – भीषण गर्मी में रेलवे यात्रियों को राहत देने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, प्लेटफॉर्म पर मिस्टिंग सिस्टम और यात्री सुविधाओं की बातें हो रही हैं, लेकिन हकीकत साउथ बिहार एक्सप्रेस के यात्रियों ने भुगती है। 03287 साउथ बिहार एक्सप्रेस के B2 कोच में रायपुर से ट्रेन रवाना होने के कुछ देर बाद ही एसी बंद हो गया, और पूरा एसी कोच आग की भट्ठी में बदल गया। महंगा किराया देकर सफर कर रहे यात्री पूरी रात उमस और गर्मी से परेशान रहे, लेकिन राहत नहीं मिली।

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रायपुर से ट्रेन छूटने के कुछ देर बाद ही एसी सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया, और धीरे-धीरे पूरा कोच दमघोंटू गर्मी से भर गया। महिलाएं हाथ से हवा करती नजर आईं, बच्चे रोते रहे बुजुर्ग पसीने से तरबतर परेशान बैठे रहे… लेकिन रेलवे स्टाफ सिर्फ यही कहता रहा कि अगले स्टेशन पर सुधार हो जाएगा। सोचिए… जब बाहर तापमान 42 से 44 डिग्री के बीच हो… और एसी कोच में ही हवा बंद हो जाए… तो हालात कितने मुश्किल हो सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब रेलवे एसी सुविधा के नाम पर पूरा किराया वसूलता है… तो फिर ट्रेन रवाना होने से पहले कोच की तकनीकी जांच क्यों नहीं होती…? एक तरफ दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे गर्मी से राहत देने के लिए स्टेशनों पर मिस्टिंग सिस्टम और ठंडी फुहार के दावे कर रहा है… वहीं दूसरी तरफ ट्रेनों के एसी कोच ही जवाब दे रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी रेलवे स्टाफ ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया… कोई तकनीकी खराबी बताता रहा… तो कोई अगले स्टेशन पर ठीक होने का भरोसा देता रहा… लेकिन घंटों तक यात्रियों को राहत नहीं मिली।

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रेलवे की ये लापरवाही सिर्फ असुविधा नहीं… बल्कि यात्रियों की सेहत और सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है। अगर किसी बुजुर्ग… बच्चे या मरीज की तबीयत बिगड़ जाती… तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता…? अब सवाल रेलवे प्रशासन से है…क्या रेलवे सिर्फ किराया वसूलने तक सीमित रह गया है…? रेलवे की ये लापरवाही सिर्फ असुविधा नहीं… बल्कि यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ है। अब यात्री कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। लेकिन सवाल वही है… जब एसी कोच में भी राहत नहीं… तो रेलवे के दावों पर भरोसा कैसे किया जाए…?

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