बिलासपुर

बिलासपुर शिक्षा विभाग का ‘जादुई’ खेल: कागजों पर स्कूटी बनी पिकअप, 60 दिन बाद भी जांच ‘लापता’!

(आशीष मौर्य संपादक) : बिलासपुर जिले में शिक्षा विभाग के भीतर एक ऐसा ‘जादुई’ परिवहन घोटाला सामने आया है, जहां कागजों पर स्कूटी और बाइक रातों-रात मालवाहक पिकअप बन गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस भ्रष्टाचार की जांच 7 दिनों में पूरी होनी थी, वह 60 दिन बीत जाने के बाद भी फाइलों और ‘अभिमत’ के फेर में उलझी हुई है।

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पूरा मामला बिल्हा विकासखंड के बिजौर संकुल का है। सूचना के अधिकार से हुए खुलासे ने शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी है। सामग्री परिवहन के नाम पर करीब 4 लाख 88 हजार रुपये का भुगतान किया गया। जिन वाहनों के नंबरों पर यह राशि निकाली गई, वे असल में स्कूटी और मोटरसाइकिल के निकले। सरकारी खजाने से लाखों की राशि का आहरण मालवाहक वाहनों के नाम पर किया गया, लेकिन धरातल पर वे वाहन कभी मौजूद ही नहीं थे।
इस कथित घोटाले में तत्कालीन प्राचार्य हेमलता पांडेय और संकुल समन्वयक मनोज सिंह ठाकुर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। मामला उजागर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 26 दिसंबर को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर 7 कार्य दिवस में रिपोर्ट मांगी थी।

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दो महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जांच टीम अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कागजी कार्रवाई पूरी है, लेकिन ‘अभिमत’ तैयार नहीं होने के कारण रिपोर्ट जमा नहीं की गई। विभाग की यह सुस्ती अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है.शिक्षा विभाग में परिवहन के नाम पर हुई यह ‘बंदरबांट’ केवल एक संकुल का मामला है या पूरे जिले में ऐसा खेल चल रहा है, यह उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।

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