छत्तीसगढ़

30 साल बाद वन रेंज में बाघ की मौजूदगी के मिले सबूत

छत्तीसगढ़ में लगभग विलुप्त हो चुके बाघ की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। गरियाबंद जिले के पांडुका वन रेंज के नागझर जंगल में तीन दशकों बाद बाघ की दस्तक दर्ज की गई है।वन विभाग को गीली मिट्टी में बाघ के पंजों के स्पष्ट निशान मिले हैं। यही नहीं, जंगल के कई अन्य हिस्सों में भी बाघ के पैरों के निशान देखे गए हैं।

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वन अधिकारियों का कहना है कि यह बाघ धमतरी जिले के सिंगपुर वन परिक्षेत्र से पैरी नदी पार करके पांडुका इलाके में पहुंचा है।

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गौरतलब है कि इस क्षेत्र में पहले से ही दो दंतैल हाथी मौजूद हैं, जिन्होंने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। अब बाघ की मौजूदगी से किसानों और स्थानीय नागरिकों में दहशत का माहौल है, खासकर ऐसे समय में जब खेतों में धान की फसल खड़ी है।

पांडुका वन विभाग ने एहतियातन नागझर जंगल के आसपास के दर्जनों गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

 

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