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गर्भवती बायसन की बेरहमी से हत्या, चेतावनी के बावजूद वन विभाग की लापरवाही उजागर

छत्तीसगढ़ के बलौदा-बाज़ार जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दिवाली के दो दिन बाद शिकारियों ने एक गर्भवती बायसन यानी गौर का बेरहमी से शिकार कर दिया। शिकारियों ने न केवल उसे करंट लगाकर मारा, बल्कि उसके सिर और पैर भी काट दिए। हैरानी की बात ये है कि इस घटना को लेकर पहले ही वन विभाग को चेतावनी दी गई थी, फिर भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

यह दर्दनाक घटना बलौदा-बाज़ार वन मंडल के अर्जुनी परिक्षेत्र की है। 27 अक्टूबर को एक गर्भवती बायसन का शव जंगल में मिला। जांच में पता चला कि शिकारियों ने बायसन को बिजली के करंट से मार डाला और उसके बाद उसका सिर और पैर काट दिए।बायसन के पेट में उसका विकसित भ्रूण भी मौजूद था, यानी अजन्मे शावक की भी मौत हो गई।

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इस घटना को लेकर रायपुर के पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। सिंघवी का कहना है कि उन्होंने दिवाली से पहले ही मुख्य वन्यप्राणी संरक्षक को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि त्योहारी सीजन में शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि इस दौरान फील्ड स्टाफ की निगरानी कमजोर रहती है। उन्होंने सुझाव दिया था कि स्निफर डॉग्स की अतिरिक्त तैनाती की जाए, बारनवापारा अभयारण्य जैसे संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए।

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लेकिन उनकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया। पत्र को बस औपचारिक रूप से फॉरवर्ड कर दिया गया, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिंघवी ने यह भी बताया कि इसी साल रायगढ़ वन मंडल में भी दिवाली के अगले दिन जंगली सूअर के शिकार के दौरान करंट से एक हाथी की मौत हो चुकी है — जो वन विभाग की लापरवाही का एक और उदाहरण है।

 

सिंघवी ने पत्र में वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि विभाग का वाइल्डलाइफ विंग अब वन्यजीव सुरक्षा की बजाय इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स में ज्यादा रुचि दिखा रहा है।

 

उन्होंने मांग की है कि सभी वन्यजीव अभ्यारण्य, नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में ट्रेंड स्निफर डॉग स्क्वॉड तैनात किए जाएं और फोकस सिर्फ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन और एंटी-पोचिंग उपायों पर होना चाहिए।

गर्भवती बायसन की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि चेतावनी और सिस्टम के बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा में चूक क्यों हो रही है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

 

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