बिलासपुर

निजी सुरक्षा पर बिलासपुर में ‘महामंथन’, CAPSI की बैठक में उठी अवैध एजेंसियों पर नकेल कसने की मांग.

(आशीष मौर्य संपादक/मयंक सिंह) : छत्तीसगढ़ में बढ़ते अपराधों के बीच निजी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और इस क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए बिलासपुर मे एक महत्वपूर्ण राज्यस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, महापौर पूजा विधानी, नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल,सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (CAPSI) के पदाधिकारियों सहित उद्योगपति और सिक्योरिटी एजेंसी के दिग्गज शामिल हुए।

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CAPSI के मीडिया प्रभारी डीके सिंह हुए सम्मानित

छत्तीसगढ़ में निजी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है। बिलासपुर में आयोजित सेंट्रल एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री(CAPSI) की राज्यस्तरीय बैठक में देश और प्रदेश के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पुलिस प्रशासन के ‘अघोषित’ मददगार यानी निजी सुरक्षा गार्ड्स की स्थिति को बेहतर बनाना और इस क्षेत्र में घुसी ‘अवैध’ एजेंसियों का सफाया करना था।बैठक में CAPSI के चेयरमैन कुंवर विक्रम सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश में बिना PASARA (Private Security Agencies Regulation Act) लाइसेंस के चल रही अवैध एजेंसियां अपराध बढ़ने की एक बड़ी वजह हैं। इन एजेंसियों के पास न तो प्रशिक्षित स्टाफ है और न ही इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड, जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है।बैठक में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल,महापौर पूजा विधानी,बिलासपुर नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, CAPSI के जनरल सेक्रेटरी महेश शर्मा सहित कई उद्योगपति और सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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सिक्योरिटी संचालकों ने विधायक अमर अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुँचाने का संकल्प लिया,सरकारी और निजी विभागों द्वारा महीनों तक भुगतान रोके जाने से गार्ड्स को समय पर वेतन नहीं मिल पाता।​एजेंसियों पर समय पर GST और PF जमा करने का दबाव होता है, भले ही उन्हें क्लाइंट से पैसा मिला हो या नहीं।

 

प्रदेश में सैकड़ों एजेंसियां बिना PASARA (Private Security Agencies Regulation Act) लाइसेंस के संचालित हो रही हैं। ये एजेंसियां न तो गार्ड का पुलिस वेरिफिकेशन कराती हैं और न ही उनका कोई रिकॉर्ड रखती हैं, जो अपराध बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है।इस मंथन का मुख्य उद्देश्य यही है कि निजी सुरक्षा को केवल ‘चौकीदारी’ न मानकर एक ‘प्रोफेशनल फोर्स’ माना जाए, वही गार्ड्स को केवल ‘चौकीदार’ न समझकर एक अनुशासित सुरक्षा बल के रूप में सम्मान देने पर जोर दिया गया.

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