78 लाख की लूट अनसुलझी, खेतों में धड़ल्ले से चल रहा लाखों का जुआ, गश्त बढ़ी, अपराध नहीं रुके

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पुलिस की छवि सुधारने की जरूरत पर जोर दिया था। लेकिन जांजगीर – चांपा की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक तरफ 78 लाख की लूट और गोलीकांड नौ महीने बाद भी अनसुलझा है…तो दूसरी तरफ खेतों में खुलेआम चल रहा लाखों का जुआ पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जांजगीर-चांपा के पिसौद, पीथमपुर, उदयबन और आसपास के इलाकों में शाम ढलते ही जुए के फड़ सज जाते हैं। ताश की गड्डियाँ खुलती हैं… मोटरसाइकिलें कतार में लगती हैं… और दांव पर लगते हैं लाखों रुपये।
वायरल वीडियो जुए के इस संगठित नेटवर्क की तस्वीर साफ दिखाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है—पुलिस गश्त जरूर करती है, पर जुआ नेटवर्क इससे कहीं ज्यादा तेज है। एक जगह कार्रवाई होती है, तो दूसरी जगह नया फड़ खुल जाता है। कई बार की छापेमारी बावजूद जुआ पूरी तरह नहीं थम सका है।
उधर, जिले का सबसे बड़ा अपराध अभी तक रहस्य बना हुआ है। 14 जनवरी 2025 को 78 लाख रुपये की लूट और गोलीकांड ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया था।
सरकारी शराब दुकान के सामने बदमाशों ने कलेक्शन टीम पर हमला किया और कैश बैग लेकर मोटरसाइकिल से फरार हो गए। दो एसपी बदले… पांच लाख का इनाम घोषित हुआ…कई जिलों में दबिश दी गई… फुटेज खंगाले गए…लेकिन नौ महीने बाद भी पुलिस एक भी ठोस सुराग तक नहीं पहुंच सकी है।
एसपी विजय पांडे के नेतृत्व में गश्त बढ़ाई गई है, कार्रवाई के दावे भी हो रहे हैं,लेकिन नतीजे साफ बताते हैं छापेमारी सतही है और जुआ नेटवर्क उससे कई कदम आगे। लूटकांड की जांच हो या जुआ पर रोक दोनों ही मोर्चों पर पुलिस की कोशिशें असरदार नज़र नहीं आतीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पुलिस को जनता का भरोसा जीतना होगा…लेकिन जांजगीर में स्थितियां उलट दिखाई देती हैं। जब बड़ा अपराध सुलझता न हो और छोटा अपराध रुकता न हो, तो जनता का भरोसा कैसे लौटे? जांजगीर पुलिस के सामने अब दो बड़ी चुनौतियाँ हैं 78 लाख लूटकांड के आरोपियों को पकड़ना और जुआ नेटवर्क को तोड़ना। इन दोनों पर निर्णायक कार्रवाई ही पुलिस की छवि सुधार सकती है।




