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एक साल तक नहीं पकड़ में आई बीमारी, ब्रोंकोस्कोपी ने खोला टीबी का राज, सिम्स में युवती को मिला नया जीवन

(जयेन्द्र गोले) : बिलासपुर – लगातार एक साल से रहस्यमयी बुखार, कमजोरी और रात में अत्यधिक पसीना आने की समस्या से जूझ रही 24 वर्षीय युवती को आखिरकार सिम्स अस्पताल में नया जीवन मिला है। कई निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल में इलाज के बावजूद बीमारी की असली वजह सामने नहीं आ पा रही थी। लेकिन सिम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आधुनिक जांच तकनीक की मदद से बीमारी का पता लगाकर सफल उपचार किया।

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सिम्स के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में भर्ती युवती की जांच के दौरान एक्स-रे और सीटी स्कैन में फेफड़ों में निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई दिए। हालांकि बलगम की जांच रिपोर्ट लगातार निगेटिव आने के कारण डॉक्टर बीमारी की पुष्टि नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद विशेषज्ञों ने ब्रोंकोस्कोपी जांच करने का फैसला लिया। डॉ. प्रतीक कुमार के निर्देशन में डॉ. अनिल कुमार डनसेना, डॉ. आकांक्षा गुप्ता और उनकी टीम ने फेफड़ों से नमूने लेकर सीबीएनएएटी जांच कराई।

जांच रिपोर्ट में तपेदिक यानी टीबी की पुष्टि हुई, जिसके बाद मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया गया। इलाज के बाद युवती के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सिम्स प्रबंधन का कहना है कि लंबे समय तक बुखार, लगातार खांसी, वजन घटना और रात में पसीना आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आधुनिक ब्रोंकोस्कोपी और सीबीएनएएटी जैसी जांच तकनीकें जटिल मामलों में टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान कर मरीजों को नया जीवन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

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