रेल हादसे के बाद लोको पायलटों ने CRS को लिखा पत्र, रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने सुरक्षा खामियों को बताया हादसों की वजह

(भूपेंद्र सिंह राठौर) : बिलासपुर रेल हादसे के बाद अब रेल सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने रेल संरक्षा आयुक्त को पत्र लिखकर सैद्धांतिक और वास्तविक कार्यपद्धति के बीच के अंतर को ही हादसों की जड़ बताया है। पत्र में कई अहम बिंदु उठाए गए हैं, जिनका सीधा संबंध लोको पायलटों की सुरक्षा, काम के दबाव और ट्रेन संचालन प्रणाली से है।
पत्र में कहा गया है कि यात्रियों और माल गाड़ियों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी के बावजूद रेलवे में लोको पायलटों के चार हजार से ज़्यादा पद रिक्त हैं।
ऐसे में लोको पायलटों पर काम का भारी दबाव है।
संगठन ने बताया कि फील्ड में लोको पायलट 14 से 16 घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में इसे 12 घंटे दर्शाया जाता है।
लोको रनिंग स्टाफ ने कहा है कि ट्रेन संचालन के दौरान लोको पायलट को काशन ऑर्डर, स्पीडोमीटर, डी.डी.एस स्क्रीन, सिग्नल एक्सचेंज, वॉकी टॉकी, ट्रैक और ओएचई निगरानी जैसे कई कार्य एक साथ करने पड़ते हैं। इन सभी के बीच में लगातार नए-नए विरोधाभाषी निर्देश जारी किए जाते हैं, जिससे असमंजस और तनाव की स्थिति बनती है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि प्रशिक्षण के दौरान एक तरीके से ट्रेन कंट्रोल सिखाया जाता है, लेकिन फील्ड में अलग तरीका अपनाने का दबाव रहता है जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। वहीं ऑटो सिग्नलिंग वाले सेक्शन में एक साथ कई सिग्नल दिखने से भी लोको पायलटों को दिक्कत होती है, जो SPAD जैसी घटनाओं की वजह बनती हैं।
एसोसिएशन ने साफ कहा है कि बिलासपुर हादसे जैसी त्रासद घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि ट्रेन संचालन प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर किया जाए और सिग्नल सिस्टम को कैब में ही प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाए। पत्र में बताया गया कि सेमिआटोमेटिक एडवांस स्टार्टर को अक्सर ऑटो मोड में रखा जाता है। ऐसे में जब स्टार्टर ‘लाल’ और एडवांस ‘ग्रीन’ दिखता है, तो लोको पायलट भ्रमित हो जाता है जो बिलासपुर हादसे जैसी घटनाओं की वजह बन सकता है।
यह स्थिति संरक्षा अधिकारी बिलासपुर के आदेशों के भी विपरीत है। रेलवे बोर्ड के अनुसार 200 किलोमीटर से ज़्यादा दूरी तय करने वाली MEMU ट्रेनों में असिस्टेंट लोको पायलट होना जरूरी है। लेकिन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में न तो ALP को MEMU ट्रेनिंग दी गई है, और न ही ट्रेन मैनेजरों को सिग्नल बेल कोड या SPAD स्थिति में ब्रेक एप्लिकेशन की पर्याप्त जानकारी दी गई है।
लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने कहा है कि सिंहपुर और गतौरा जैसी दुर्घटनाओं से सीख लेते हुए रेलवे को ट्रेन संचालन में सुधार लाने की ज़रूरत है। एसोसिएशन ने आश्वासन दिया है कि संरक्षित रेल संचालन और उत्पादकता बढ़ाने में वे रेलवे प्रशासन को पूरा सहयोग देंगे।




