स्लैब कम होने का ग्राहकों को नहीं फायदा, जीएसटी कटौती का भरोसा दिखा पुराने रेट पर बेच रहे सामान

(दिलीप जगवानी/सतीश साहू) : बिलासपुर – जीएसटी का स्लैब कम होने पर भी बाजार में समान पुरानी कीमत पर बेचकर ग्राहको की जेब काटी जा रही है। इस पर रोक लगाने के लिए जीएसटी अधिकारी या जिला प्रशासन बाजार मे नहीं है। निगरानी के निर्देशों की धज्जियां उड़ रही और ग्राहक लूटे जा रहे है। सस्ते मे सामान मिलने की सरकार की गारंटी कहीं नहीं दिख रही।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर बाजार में GST दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने की जांच की। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा अमर कॉलोनी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता त्रिनगर के तोताराम बाजार में GST बचत उत्सव में शामिल हुए। वहां के लोगों की किस्मत अच्छी जो दिग्गज नेता उनके हितों के लिए बाजार मे पहुंचे। लेकिन ऐसी किस्मत छत्तीसगढ़ वासियों की पहले भी कहां थी जो उनके हितों की सुध लेने के लिए स्थानीय मंत्री नेता तत्पर दिखते।
पुराने समान को बेचने पर दुकानदार को बिल्कुल भी घाटा नहीं होगा। सरकार के मुताबिक, दुकानदार जीएसटी रिटर्न फाइल करते समय इसे एडजस्ट करेंगे। इसके उलट बिलासपुर के व्यापारी अपने ग्राहकों का हक मारने पर तुले है। वो बिल मे खरीदी पर 18 और 5 प्रतिशत जीएसटी दिखाकर पुराने रेट पर माल खपा रहे है। वाणिज्यकर जीएसटी विभाग के बिलासपुर कार्यालय मे खामोशी है।
सरकार के निर्देशों के विपरीत अधिकारी और निरीक्षक हाथ पर हाथ धरे बैठे है। बाजार मे लूट मची है ग्राहक खुलेआम ठगे जा रहे है। यह बताने पर वे ऊपर से निर्देश का इंतजार कर रहे। पिछला जीएसटी एकत्र करने मे व्यस्त विभाग शिकायतों को अनसुना कर रहा है। जब तक परिपालन का आर्डर निकलता है उतने समय मे जिले के खुले बाजार मे ग्राहकों के जेब से करोड़ों रु निकल जाएगा वो जीएसटी कटौती के बावजूद समान की ऊंची कीमत अदा कर चुके होंगे। सरकार ने साफ किया है कि दुकानदार पक्का बिल बनाता है तो बिल में स्पष्ट नजर आएगा कि जीएसटी नई दरों के तहत लगाया है या नहीं। जिन सामानों पर जीएसटी दर घटी है, उनकी सूची से भी मिला सकते हैं।
इसके अलावा, आप दुकानदार से सीधे-सीधे पूछ भी सकते हैं। यानी कि बिल में साफ-साफ दिखेगा कि दुकानदार ने पूरा लाभ दिया है या नहीं। परंतु रेट कम किया बताकर पुरानी दर पर ही धड़ल्ले से माल बिक रहा है। जागरूकता के अभाव मे ग्राहक मूर्ख बनाए जा रहे है। जिससे सरकार की मंशा परवान नहीं चढ़ रही है।




