छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, दो सप्ताह में फोटो सहित रिपोर्ट पेश करने का आदेश

छत्तीसगढ़ की खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराज़गी जताई है। बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे और अन्य प्रमुख सड़कों की बदहाली पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने शासन और एनएचएआई को फटकार लगाई।
गुरुवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और उनकी डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान शासन ने कोर्ट को बताया कि रतनपुर-सेंदरी रोड का काम लगभग पूरा हो गया है, जबकि रायपुर रोड की 70 प्रतिशत सड़क बन चुकी है और अगले 15 दिनों में काम पूरा कर लिया जाएगा। वहीं एनएचएआई ने भी जल्द ही निर्माण कार्य खत्म करने का दावा किया।
लेकिन कोर्ट ने सरकार और एजेंसी के जवाबों से असंतोष जताते हुए कहा कि सिर्फ शपथ पत्र और कागजों पर रिपोर्ट देने से काम नहीं चलेगा। हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या सिर्फ पेचिंग करने से सड़कें ठीक हो जाएंगी और दोबारा दरारें नहीं पड़ेंगी इसकी क्या गारंटी है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में यहां तक कहा—“अगर आप नहीं बना सकते तो क्या हम बनाएंगे सड़क?”
कोर्ट ने अफसरों से पूछा कि सड़क सुधार की स्टडी पूरी करने में कितना वक्त लगेगा, क्या इसके लिए दो-तीन जन्म चाहिए? कोर्ट ने कहा कि यह मॉडर्न इंडिया है और अब भी पेन-कॉपी पर काम हो रहा है।हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि सरकार और एनएचएआई अगली सुनवाई से पहले फोटो सहित विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। सुनवाई अब 23 सितंबर को होगी।
सुनवाई में एनएचएआई ने यह भी जानकारी दी कि तुर्काडीह, सेंदरी, रानीगांव, मलनाडीह और बेलतरा में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। पहले इसकी अनुमानित लागत 17.95 करोड़ थी, जो अब घटकर 11.38 करोड़ रह गई है। टेंडर जारी कर दिया गया है और मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि बिलासपुर की पेंड्रीडीह बाईपास से नेहरू चौक तक की सड़क का काम अप्रैल में स्वीकृत होने के बावजूद आज तक क्यों शुरू नहीं हुआ। इसी तरह रायपुर एयरपोर्ट रोड का निर्माण भी अब तक अधूरा है।हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब देखना होगा कि सरकार और एनएचएआई सड़क सुधार को लेकर कितनी गंभीरता दिखाते हैं और अगली सुनवाई में क्या रिपोर्ट सामने आती है।




