नक्सली था स्कूल में पदस्थ रसोईया ! मिलता था भुगतान, पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया, वांटेड कर्मी पर था 1 लाख का ईनाम

(दिलीप जगवानी) : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हाल ही में चले नक्सल विरोधी अभियान के दौरान मारे गए सात माओवादियों में से एक की पहचान महेश कोडियाम के रूप में हुई है, जो सरकारी स्कूल में सहायक रसोइये के रूप में कार्यरत था। इस खुलासे के बाद से मामला और भी जटिल हो गया है।
बीजापुर पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार, महेश कोडियाम फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के इरपागुट्टा गांव का निवासी था और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र समिति के माओवादी सदस्य के रूप में सूचीबद्ध था। हालांकि बाद में यह सामने आया कि वह अपने गांव के प्राथमिक शाला में मिड-डे मील बनाने का कार्य करता था और उसे मार्च 2025 तक वेतन भी दिया गया था।
4 से 7 जून के बीच इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में चले संयुक्त सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान कई मुठभेड़ें हुईं थीं, जिनमें नक्सलियों की केंद्रीय समिति के सदस्य सुधाकर उर्फ नरसिंह चालम और तेलंगाना राज्य समिति के सदस्य भास्कर उर्फ मेलारापु अडेलु सहित कुल सात माओवादी मारे गए थे। सुधाकर पर ₹40 लाख, और भास्कर पर ₹45 लाख का इनाम था।
इरपागुट्टा गांव के ग्रामीणों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि महेश का माओवादियों से कोई संबंध नहीं था। वे सिर्फ स्कूल में मिड-डे मील बनाने का काम करते थे और इसके लिए उन्हें बाकायदा भुगतान भी मिलता था। ग्रामीणों ने बताया कि महेश का परिवार बड़ा है, जिसमें पत्नी और सात बच्चे हैं।
बीजापुर पुलिस ने कहा है कि, “इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर महेश कोडियाम किस परिस्थितियों में सुधाकर और भास्कर जैसे शीर्ष माओवादियों के संपर्क में आया। सभी पहलुओं की गहन व निष्पक्ष जांच की जा रही है।
सवालों के घेरे में नियुक्ति प्रक्रिया
घटना के बाद स्कूल प्रबंधन समिति की नियुक्ति प्रक्रिया, पृष्ठभूमि जांच और सरकारी व्यवस्था की निगरानी प्रणाली भी सवालों के घेरे में है। यदि महेश वास्तव में सक्रिय माओवादी था, तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर संकेत हो सकता है।यह मामला नक्सलवाद और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब अब जांच पर निर्भर करेगा।




